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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर हत्या मामले में किशोर की याचिका खारिज की, निचली अदालत के आदेश बरकरार

जुवेनाइल एक्स बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर हत्या मामले में जुवेनाइल एक्स की याचिका खारिज की, उम्र पर विरोधाभासी दावे और संदिग्ध स्कूल रिकॉर्ड को आधार माना।

CB News Desk
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर हत्या मामले में किशोर की याचिका खारिज की, निचली अदालत के आदेश बरकरार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को ''जुवेनाइल एक्स'' नामक युवक की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने 2016 के फतेहपुर हत्या मामले में खुद को अपराध के समय नाबालिग घोषित करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकलपीठ ने किशोर न्याय बोर्ड और चिल्ड्रन कोर्ट के फैसलों को सही ठहराते हुए कहा कि अल्पायु होने के दावे विरोधाभासी और अविश्वसनीय सबूतों पर आधारित हैं।

पृष्ठभूमि

मामला 1 अप्रैल 2016 का है, जब फतेहपुर जिले के हथगांव थाने में हत्या, आपराधिक धमकी, अवैध बंधन और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी।

जुवेनाइल एक्स, नरेंद्र सिंह यादव का बेटा, ने शुरू में किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के सामने कहा कि उसके पास कोई शैक्षिक प्रमाणपत्र नहीं है। इस पर बोर्ड ने चिकित्सीय आयु परीक्षण कराने का आदेश दिया। अस्थि परीक्षण (ossification test) में उसकी उम्र लगभग 19 वर्ष पाई गई, जिससे वह अपराध की तिथि पर बालिग माना गया। अगस्त 2016 में JJB ने इसी आधार पर उसका नाबालिग होने का दावा खारिज कर दिया।

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बाद में अपील की कार्यवाही के दौरान बचाव पक्ष ने स्कूल प्रमाणपत्र पेश किए और कहा कि उसकी जन्मतिथि 15 अप्रैल 2001 है, जिससे अपराध की तारीख पर उसकी उम्र सिर्फ 14 साल 11 महीने और 16 दिन होती। इस अचानक बदले हुए रुख ने अदालतों की नजर में गंभीर शंकाएँ खड़ी कर दीं।

अदालत की टिप्पणियाँ

फतेहपुर की अपीलीय अदालत ने जब इन नए दस्तावेज़ों की जांच की तो उसमें गड़बड़ियां सामने आईं। चौधरी रघुनाथ सहाय इंटर कॉलेज के प्राचार्य ने गवाही में कहा कि स्कूल रजिस्टर में पहले जन्मतिथि लाल स्याही में 30 जून 2014 लिखी थी, जिसे काटकर बाद में नीली स्याही से 15 अप्रैल 2001 दर्ज किया गया।

अदालत ने टिप्पणी की-

''ऐसी काट- छांट और दोबारा लिखावट भरोसा पैदा नहीं करती।''

हाईकोर्ट ने भी इन्हीं विरोधाभासों को गंभीर माना। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने कहा,

''पुनरीक्षणकर्ता ने अलग-अलग मंचों पर विरोधाभासी दावे किए—पहले दस्तावेज़ न होने का और फिर संदिग्ध रिकॉर्ड पेश करने का। यह आचरण उसके अपने दावे को कमजोर करता है।''

पीठ ने पराग भाटी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2016) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि हत्या जैसे जघन्य अपराधों में नाबालिग होने के दावों की सख्ती से जांच होनी चाहिए।

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फैसला

सबूतों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष दिया कि किशोर न्याय बोर्ड और चिल्ड्रन कोर्ट के समवर्ती निष्कर्षों में दखल देने का कोई आधार नहीं है। दोनों ने अल्पायु होने के दावे को अविश्वसनीय पाया।

आदेश में स्पष्ट कहा गया- ''पुनरीक्षण निराधार है और इसे खारिज किया जाता है।''

इस खारिजी आदेश के साथ मामला अब एक वयस्क अभियुक्त के रूप में चलेगा, यानी जुवेनाइल एक्स को किशोर न्याय अधिनियम के सुरक्षा प्रावधानों के बजाय सामान्य आपराधिक न्याय प्रणाली का सामना करना होगा।

मामले का शीर्षक : जुवेनाइल एक्स बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य

मामले संख्या : क्रिमिनल रिवीजन संख्या 3685 सन् 2025

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