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पिस्तौल दिखाकर बच्चे का अपहरण करना भी ‘जान से मारने की धमकी’ के बराबर है, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के यूपी बाल अपहरण मामले में दो दोषियों की उम्रकैद बरकरार रखते हुए कहा कि पिस्तौल के दम पर अपहरण धारा 364A IPC के तहत गंभीर धमकी माना जाएगा। - हरजिन्द्र सिंह आदि बनाम उत्तर प्रदेश राज्य।

CB News Desk
पिस्तौल दिखाकर बच्चे का अपहरण करना भी ‘जान से मारने की धमकी’ के बराबर है, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के चर्चित बाल अपहरण मामले में दो दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए कहा है कि स्कूल जा रहे बच्चे का पिस्तौल दिखाकर अपहरण करना अपने आप में “मौत या चोट की धमकी” माना जाएगा, जो आईपीसी की धारा 364A के लिए पर्याप्त है।

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने हरजिंद्रा सिंह और दिलबाग सिंह उर्फ मिट्ठू की अपील खारिज कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 5 अगस्त 2003 का है। अभियोजन के अनुसार, आठ वर्षीय सतनाम सिंह अपनी बहनों के साथ साइकिल से स्कूल जा रहा था। तभी राजदूत मोटरसाइकिल पर आए दो लोगों ने बच्चों को पिस्तौल दिखाकर रोका और सतनाम का अपहरण कर लिया।

बाद में पुलिस ने दिलबाग सिंह की निशानदेही पर शाहजहांपुर जिले के एक मकान से बच्चे को बरामद किया। वहां से बच्चे की स्कूल यूनिफॉर्म, खिलौने और झूला भी बरामद हुआ। जांच के दौरान हरजिंद्रा सिंह की निशानदेही पर .315 बोर की देशी पिस्तौल और कारतूस भी मिले।

ट्रायल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को धारा 364A और 368 IPC के तहत दोषी ठहराया था। हरजिंद्रा सिंह को आर्म्स एक्ट में भी दोषी माना गया। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि बच्चे को जान से मारने या चोट पहुंचाने की कोई स्पष्ट धमकी दी गई थी। उनका तर्क था कि धारा 364A लागू करने के लिए यह जरूरी तत्व है।

उन्होंने यह भी कहा कि कथित फिरौती कॉल से जुड़ा कोई कॉल रिकॉर्ड या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश नहीं किया गया और पहचान परेड (TIP) भी नहीं कराई गई।

कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चों को पिस्तौल दिखाकर अगवा करना ही गंभीर धमकी माना जाएगा।

पीठ ने कहा, “स्कूल जा रहे छोटे और असहाय बच्चों को .315 बोर की पिस्तौल दिखाकर रोकना अपने आप में मौत या चोट पहुंचाने की गंभीर धमकी है।”

कोर्ट ने फिरौती की मांग को भी साबित माना। अदालत ने कहा कि पीड़ित परिवार के सदस्यों ने लगातार यह बयान दिया कि घटना वाले दिन 5 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी।

पहचान परेड नहीं होने के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि आरोपियों की निशानदेही पर बच्चे और हथियार की बरामदगी अभियोजन के मामले को मजबूत बनाती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि “दुश्मनी” के आधार पर झूठा फंसाने का आरोप पूरी तरह अस्पष्ट और बिना किसी ठोस आधार के था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपहरण, फिरौती की मांग, बच्चे की बरामदगी और दोनों आरोपियों की भूमिका को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है।

इसी के साथ अदालत ने दोनों अपीलें खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।

Case Details

Case Title: Harjindra Singh Etc. v. State of U.P.

Case Number: Criminal Appeal Nos. 2811-2812 of 2024

Judges: Justice Pankaj Mithal and Justice Prasanna B. Varale

Decision Date: May 27, 2026

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