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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में दोषसिद्धि की अपील पर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया, कहा कि कानूनी सहायता मात्र 'औपचारिकता' नहीं हो सकती

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए हत्या मामले की अपील पर दोबारा सुनवाई का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रभावी कानूनी सहायता आरोपी का महत्वपूर्ण अधिकार है। - नंदकिशोर मिश्रा बनाम मध्य प्रदेश राज्य

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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में दोषसिद्धि की अपील पर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया, कहा कि कानूनी सहायता मात्र 'औपचारिकता' नहीं हो सकती

सुप्रीम कोर्ट ने एक हत्या मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी आरोपी को दी जाने वाली कानूनी सहायता केवल “औपचारिक प्रक्रिया” नहीं हो सकती, बल्कि वह प्रभावी और सार्थक होनी चाहिए।

कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि आरोपी को यह जानकारी ही नहीं दी गई थी कि उसकी ओर से अदालत ने अमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) नियुक्त किया है।

मामले की पृष्ठभूमि

नंदकिशोर मिश्रा को वर्ष 2022 में ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला अक्टूबर 2020 की हत्या से जुड़ा था। बाद में हाईकोर्ट ने भी सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

हाईकोर्ट में 20 नवंबर 2025 को सुनवाई के दौरान आरोपी का निजी वकील उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने एक अमिकस क्यूरी नियुक्त किया और अगले सप्ताह मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

26 नवंबर 2025 को अमिकस क्यूरी ने अपील पर बहस की और उसी दिन हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट में आरोपी की ओर से कहा गया कि वह लगातार जेल में था और उसे न तो अमिकस की नियुक्ति की जानकारी दी गई और न ही सुनवाई के बारे में बताया गया। यह भी कहा गया कि अमिकस ने उससे जेल में मुलाकात तक नहीं की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी को सुनवाई या अमिकस की नियुक्ति की सूचना दी गई थी।

पीठ ने कहा कि भले ही हाईकोर्ट पर आरोपी को अलग से सूचित करने की कानूनी बाध्यता नहीं थी, लेकिन ऐसा करना “उचित और बेहतर कदम” होता।

कोर्ट ने कहा,

“आरोपी को दी जाने वाली कानूनी सहायता केवल रस्म अदायगी या औपचारिकता नहीं हो सकती, बल्कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसे प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व मिले।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसलों भोला महतो और अनोखी लाल मामलों का भी उल्लेख किया और कहा कि अमिकस क्यूरी को मामले की तैयारी के लिए पर्याप्त समय और आरोपी से बातचीत का अवसर मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का 26 नवंबर 2025 का फैसला रद्द करते हुए मामले को नई सुनवाई के लिए वापस भेज दिया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि अपील को दो महीने के भीतर सूचीबद्ध किया जाए और संभव हो तो वही जज इस मामले की सुनवाई करें जिन्होंने पहले फैसला दिया था।

साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी की अपील का अंतिम निर्णय होने तक वह हिरासत में ही रहेगा।

Case Details

Case Title: Nandkishore Mishra v. State of Madhya Pradesh

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (CRL) No. 3371 of 2026

Judge: Justice Dipankar Datta and Justice Satish Chandra Sharma

Decision Date: May 22, 2026

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