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उच्च न्यायालय ने जघन्य बाल यौन उत्पीड़न और हत्या मामले में जमानत खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 के नाबालिग बलात्कार और हत्या मामले में राजाब अली खान की जमानत याचिका खारिज की। कोर्ट ने अभियोजन के पक्ष में मजबूत फोरेंसिक, मेडिकल और सीसीटीवी सबूतों का हवाला दिया।

Shivam Y.
उच्च न्यायालय ने जघन्य बाल यौन उत्पीड़न और हत्या मामले में जमानत खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजाब अली खान की जमानत याचिका खारिज कर दी, जो 2018 में नाबालिग लड़की के बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपी है। न्यायमूर्ति स्वरना कांता शर्मा ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि मेडिकल, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आरोपी को अपराध से जोड़ते हैं।

“...आरोपों की गंभीरता, अपराध की वीभत्स और क्रूर प्रकृति, तथा प्रथम दृष्टया मजबूत सामग्री को देखते हुए... इस स्तर पर जमानत देने का कोई आधार नहीं है,”— न्यायमूर्ति स्वरना कांता शर्मा

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22 अक्टूबर 2018 को 10–12 साल की एक लड़की राजाब अली के घर नमाज की ट्यूशन के लिए गई थी और लापता हो गई। छह दिन बाद उसका शव बायोडायवर्सिटी पार्क, वजीराबाद से मिला। प्राथमिकी (FIR) पहले अपहरण के लिए दर्ज की गई थी, जिसे बाद में बलात्कार, हत्या, साक्ष्य नष्ट करने और POCSO अधिनियम की धाराओं के तहत बढ़ाया गया।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी और उसकी पत्नी ने नमाज की ट्यूशन के बहाने लड़की को अपने घर बुलाया, उसे नशीला पदार्थ दिया और उस पर बार-बार यौन हमला किया। जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो गिरफ्तारी के डर से आरोपी ने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।

“योनि और गुदा में चोटें... हिंसात्मक और बार-बार यौन उत्पीड़न की पुष्टि करती हैं,”— पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

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प्रमुख सबूतों में शामिल थे:

CCTV फुटेज जिसमें राजाब अली को सूटकेस के साथ उस जगह जाते देखा गया जहां शव मिला।

माँ की गवाही जिसने पुष्टि की कि बच्ची को आखिरी बार आरोपी के घर में देखा गया था।

FSL रिपोर्ट जिसमें प्लास्टिक बैग, कपड़े और रूमाल आरोपी के घर से मिले सामान से मेल खाते पाए गए।

रासायनिक विश्लेषण में यह पाया गया कि आरोपी के पास से मिले टैबलेट्स में क्लोनाज़ेपम नामक नशीला पदार्थ था जो पीड़िता को बेहोश करने के लिए इस्तेमाल हुआ।

“परिस्थितियों की कड़ी एक सुसंगत और ठोस साक्ष्य श्रृंखला बनाती है... जो सीधे आरोपी की सक्रिय भूमिका की ओर इशारा करती है,”— दिल्ली हाईकोर्ट

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यह 12वीं जमानत याचिका थी जिसे आरोपी की 7 साल की न्यायिक हिरासत और झूठे फंसाए जाने के दावे के बावजूद खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्य की कड़ी न केवल पूर्ण है, बल्कि आरोपी को सीधे तौर पर दोषी ठहराने वाली है।

कोर्ट ने X बनाम राजस्थान राज्य (2024 SCC OnLine SC 3539) के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामलों में जब ट्रायल शुरू हो चुका हो, तो जमानत देने में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।

कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि शेष गवाहों की जल्द से जल्द गवाही दर्ज की जाए, क्योंकि 36 में से 14 गवाह अभियोजन पक्ष के समर्थन में गवाही दे चुके हैं।

“यह समय जमानत के लिए उपयुक्त नहीं है... रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री जमानत के खिलाफ है,”— दिल्ली हाईकोर्ट

इस प्रकार जमानत याचिका और संबंधित सभी आवेदन खारिज कर दिए गए।

शीर्षक: रजब अली खान बनाम दिल्ली राज्य

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