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जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय: आरोपी से सीधे संबंध के बिना केवल मेडिकल साक्ष्य से बलात्कार साबित नहीं हो सकता

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का फैसला: केवल मेडिकल रिपोर्ट से रेप का दोष साबित नहीं होता जब तक कि आरोपी से कोई सीधा या परिस्थितिजन्य संबंध न हो।

Shivam Y.
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय: आरोपी से सीधे संबंध के बिना केवल मेडिकल साक्ष्य से बलात्कार साबित नहीं हो सकता

जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि केवल यह मेडिकल प्रमाण कि यौन संबंध हुए हैं, तब तक रेप का अपराध साबित नहीं करता जब तक आरोपी से सीधा या परिस्थितिजन्य सबूत मौजूद न हो।

जस्टिस संजय धर ने यह टिप्पणी बसीत बशीर की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अदालत ने देखा कि हालांकि मेडिकल रिपोर्ट्स से यह स्पष्ट है कि पीड़िताओं के साथ यौन संबंध हुए, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं था जो सीधे तौर पर आरोपी को इस कृत्य से जोड़ता हो।

“जब आरोपी को कथित यौन हमले से जोड़ने वाला कोई मौखिक या वैज्ञानिक सबूत नहीं है, तब अभियोजन पक्ष का मामला टिक नहीं सकता,”— जस्टिस संजय धर

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मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी 14 वर्षीय बेटी और उसकी एक नाबालिग सहेली लापता हैं। अगले दिन दोनों लड़कियां वापस लौटीं और मेडिकल जांच में उनके साथ यौन संबंध होने की पुष्टि हुई।

पुलिस ने बसीत बशीर पर आरोप लगाया कि उसने दोनों लड़कियों को बहला-फुसलाकर गाड़ी में बैठाया और उनके साथ दुष्कर्म किया। IPC की धारा 376 और POCSO अधिनियम की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया और विशेष न्यायाधीश ने मार्च 2022 में आरोप तय किए। बशीर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि कोई सबूत उसके खिलाफ नहीं है।

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जस्टिस धर ने दोनों नाबालिग लड़कियों के CrPC धारा 164 के तहत दर्ज बयान पढ़े। दोनों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अपनी मर्जी से बाहर गई थीं और कोई वाहन न मिलने के कारण उन्होंने आरोपी से लिफ्ट ली। उन्होंने किसी प्रकार के ज़बरदस्ती या बहकावे से इंकार किया।

“लड़कियां अपनी मर्जी से गाड़ी में सवार हुईं, आरोपी द्वारा किसी प्रकार का वादा या प्रलोभन नहीं दिया गया,”— अदालत ने कहा

परिवार के सदस्य भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि लड़कियां स्वेच्छा से घर से निकली थीं। किसी भी गवाह ने यह नहीं कहा कि आरोपी ने उन्हें अगवा किया या किसी प्रकार की जबरदस्ती की।

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हालांकि डॉक्टरों ने यौन संबंध की पुष्टि की, कोई स्पर्म नहीं मिला, और कोई डीएनए या फॉरेंसिक लिंक भी नहीं था जो बशीर को इस कृत्य से जोड़ता हो। दोनों लड़कियों ने अपने बयानों में यौन हमले का कोई आरोप नहीं लगाया।

“सिर्फ डॉक्टर की राय के आधार पर कि लड़कियों के साथ यौन संबंध हुए, यह नहीं माना जा सकता कि आरोपी ने ही ये कृत्य किया,”— जस्टिस धर की टिप्पणी

कानूनी दृष्टांतों का हवाला

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया, जैसे:

भारत संघ बनाम प्रफुल्ल कुमार सामल

दिलावर बालू कुराने बनाम महाराष्ट्र राज्य

सज्जन कुमार बनाम सी.बी.आई

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अंतिम निर्णय

हाई कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि बशीर के खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता और विशेष न्यायाधीश ने बिना पर्याप्त जांच के आरोप तय किए।

“जांच एजेंसी द्वारा एकत्र की गई सामग्री यदि अप्रमाणित भी मानी जाए, तो भी यह यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि याचिकाकर्ता ने कोई अपराध किया है,”— जस्टिस संजय धर

अदालत ने आरोप तय करने का आदेश रद्द किया, बशीर को सभी आरोपों से मुक्त किया और केस खारिज कर दिया।

मामले का शीर्षक: बसीत बशीर बनाम जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश

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