केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पुलिस सत्यापन रिपोर्ट के दौरान किसी व्यक्ति को नौकरी के लिए “उपयुक्त” या “अयोग्य” घोषित नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल उम्मीदवार के चरित्र और आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी देने तक सीमित है, जबकि नियुक्ति के लिए उसकी उपयुक्तता का फैसला नियोक्ता को करना होता है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता मिधुन एम. एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। नियुक्ति प्रक्रिया के तहत उनसे चरित्र एवं पृष्ठभूमि सत्यापन (Antecedent Verification) के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा करने को कहा गया था।
रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2025 में एक सड़क दुर्घटना के संबंध में उनके खिलाफ पेरूरकड़ा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। दुर्घटना में दूसरे वाहन चालक की मृत्यु हो गई थी। जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में दाखिल की जा चुकी थी।
इसी बीच पुलिस सत्यापन प्रक्रिया के दौरान जिला पुलिस प्रमुख की ओर से 8 मई 2026 को एक रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट में लंबित मामले का उल्लेख करते हुए मिधुन को “नियुक्ति के लिए उपयुक्त नहीं” बताया गया।
इसके आधार पर एचएलएल लाइफकेयर ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने केरल पुलिस अधिनियम, 2011 की धारा 53 का परीक्षण किया। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान पुलिस को केवल किसी व्यक्ति के पूर्ववृत्त (Antecedents) की जांच और रिपोर्ट देने का अधिकार देता है।
अदालत ने कहा, “सत्यापन रिपोर्ट में केवल उम्मीदवार के आपराधिक पूर्ववृत्त का विवरण दिया जा सकता है। उसकी नियुक्ति के लिए उपयुक्तता या अनुपयुक्तता तय करना नियोक्ता का विशेष अधिकार है।”न्यायालय ने यह भी पाया कि रिपोर्ट में विरोधाभास था। एक कॉलम में लिखा गया था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है, जबकि दूसरी ओर उसी रिपोर्ट में लंबित मामले का हवाला देकर उन्हें नौकरी के लिए अयोग्य बताया गया।
फैसले में अदालत ने कहा, “किसी पद के लिए उम्मीदवार की उपयुक्तता का निर्णय पुलिस नहीं कर सकती।”अदालत ने अपने पूर्व के फैसले Manju B. v. District Police Chief का भी उल्लेख किया, जिसमें इसी सिद्धांत को स्वीकार किया गया था।
फैसला
हाई कोर्ट ने पुलिस सत्यापन रिपोर्ट में दर्ज “नियुक्ति के लिए उपयुक्त नहीं” संबंधी टिप्पणी को रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा कि यह टिप्पणी अधिकार क्षेत्र से बाहर, मनमानी और विधिक रूप से अस्थिर है। इसलिए इसका उपयोग याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति थॉमस ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य सरकार को सत्यापन रिपोर्ट के प्रारूप में मौजूद “उपयुक्तता” संबंधी कॉलम हटाने पर विचार करना चाहिए।
इन्हीं निर्देशों के साथ अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली।
Case Details:
Case Title: Midhun M v. HLL Lifecare Limited & Others
Case Number: W.P.(C) No. 17992 of 2026
Judge: Justice Bechu Kurian Thomas
Decision Date: May 26, 2026


