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निष्पक्ष सुनवाई के लिए प्रासंगिक दस्तावेज जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में अस्पताल रिकॉर्ड तलब करने का दिया आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए प्रासंगिक साक्ष्य को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता और अस्पताल रिकॉर्ड तलब करने का निर्देश दिया। - रणजीत रायगर बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य।

CB News Desk
निष्पक्ष सुनवाई के लिए प्रासंगिक दस्तावेज जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में अस्पताल रिकॉर्ड तलब करने का दिया आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि किसी आपराधिक मुकदमे में यदि कोई प्रासंगिक तथ्य या दस्तावेज बाद में सामने आता है, तो आरोपी को उसे अपने बचाव में पेश करने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। अदालत ने माना कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार न्यायिक प्रक्रिया का मूल हिस्सा है और इसे केवल तकनीकी कारणों से सीमित नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता रणजीत रैगर ने जयपुर स्थित विशेष POCSO अदालत के 25 अप्रैल 2023 के आदेश को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के तहत दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, फागी से कुछ रिकॉर्ड मंगाने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता ने जून 2021 में एक बच्चे को जन्म दिया था और अस्पताल में उसकी उम्र 19 वर्ष दर्ज की गई थी। बचाव पक्ष का दावा था कि यह रिकॉर्ड मुकदमे में उम्र संबंधी विवाद के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

दूसरी ओर, राज्य की ओर से कहा गया कि स्कूल रिकॉर्ड में पीड़िता की जन्मतिथि 15 जनवरी 2010 दर्ज है और इसलिए घटना के समय वह नाबालिग थी। अभियोजन ने यह भी तर्क दिया कि आवेदन मुकदमे में देरी करने के उद्देश्य से अंतिम चरण में दाखिल किया गया था।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जब पीड़िता का बयान दर्ज हुआ था, तब अस्पताल रिकॉर्ड संबंधी जानकारी याचिकाकर्ता के पास उपलब्ध नहीं थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि आरटीआई के माध्यम से जानकारी मिलने के तुरंत बाद संबंधित आवेदन दायर किया गया था।

न्यायमूर्ति अनूप कुमार धंद ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आवेदन को गुण-दोष के आधार पर नहीं बल्कि तकनीकी आधार पर खारिज किया था।

अदालत ने कहा, “यदि मुकदमे के समापन से पहले कोई ऐसा तथ्य आरोपी या न्यायालय के संज्ञान में आता है जो मामले के न्यायसंगत निर्णय के लिए प्रासंगिक हो, तो आरोपी को उसे प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाना चाहिए।”

पीठ ने आगे कहा कि किसी स्वीकार्य दस्तावेज को रिकॉर्ड पर लाने का अवसर न देना न्याय के साथ अन्याय की स्थिति पैदा कर सकता है। अदालत के अनुसार, धारा 91 सीआरपीसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायालय के समक्ष सभी आवश्यक और प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध हों ताकि सही और निष्पक्ष निर्णय लिया जा सके।

मामले में आंशिक राहत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, फागी से संबंधित प्रवेश टिकट (Admission Ticket) तलब करने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को अंतिम अवसर देते हुए उस दस्तावेज के संबंध में पीड़िता से जिरह करने की अनुमति देने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को इस उद्देश्य के लिए तिथि निर्धारित कर आगे कानून के अनुसार कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही 25 अप्रैल 2023 का आदेश आंशिक रूप से संशोधित करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

Case Details

Case Title: Ranjeet Raigar v. State of Rajasthan & Anr.

Case Number: S.B. Criminal Miscellaneous (Petition) No. 2586/2023

Judge: Justice Anoop Kumar Dhand

Decision Date: 26 May 2026

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