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आधार सिर्फ पहचान का दस्तावेज है या उससे अधिक? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है जिसमें आधार को केवल पहचान पत्र तक सीमित रखने और नागरिकता, निवास व जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में उपयोग रोकने की मांग की गई है। - Ashwini Kumar Upadhyay v. Union of India

Zaved Khan
आधार सिर्फ पहचान का दस्तावेज है या उससे अधिक? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 जून) को एक महत्वपूर्ण याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब तलब किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आधार कार्ड का उपयोग उसके कानूनी दायरे से आगे बढ़कर नागरिकता, निवास, अधिवास (डोमिसाइल) और जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए इसे पहले से लंबित समान मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से अधिवक्ता अश्वनी दुबे के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और भारत निर्वाचन आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि आधार का उपयोग केवल पहचान के प्रमाण के रूप में किया जाए, न कि नागरिकता, निवास, पता या जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 स्पष्ट रूप से कहती है कि आधार नागरिकता या अधिवास का प्रमाण नहीं है। याचिका में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना का भी हवाला दिया गया है।

याचिका में कहा गया, “आधार पहचान का प्रमाण है, नागरिकता, पता या जन्मतिथि का नहीं।”

याचिका में विशेष रूप से नए मतदाता पंजीकरण के लिए उपयोग होने वाले फॉर्म-6 पर सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि फॉर्म-6 में आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जबकि यह आधार अधिनियम और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

याचिका में कहा गया, “आधार का उपयोग केवल पहचान के लिए नहीं, बल्कि आयु, नागरिकता और अधिवास के प्रमाण के रूप में भी किया जा रहा है। इसके साथ ही नए मतदाता पंजीकरण फॉर्म में इसे जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।”

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मौजूदा सत्यापन व्यवस्था पर्याप्त नहीं है और इससे ऐसे व्यक्तियों के नाम भी मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं जिनके पास आवश्यक दस्तावेजों का पर्याप्त सत्यापन नहीं हुआ हो।

अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर प्रारंभिक विचार करते हुए केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया।

पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई से पहले संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और इसे समान मुद्दों से जुड़ी लंबित याचिकाओं के साथ टैग कर दिया।

याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि आधार को केवल पहचान के दस्तावेज के रूप में उपयोग करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही फॉर्म-6 में आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की व्यवस्था को कानून के विपरीत घोषित करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने चुनावी सत्यापन प्रणाली में व्यापक सुधार और निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का भी सुझाव दिया है। इस समिति में एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।

फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले को इसी विषय से संबंधित लंबित मामलों के साथ जोड़ते हुए आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

Case Details:

Case Title: Ashwini Kumar Upadhyay v. Union of India

Case Number: W.P.(C) No. 654/2026 (Diary No. 30016/2026)

Judge: Chief Justice Surya Kant and Justice V. Mohana

Decision Date: June 16, 2026

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