नागपुर में बैठे बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अमरावती नगर निगम के एक सड़क मरम्मत टेंडर विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने एक ठेकेदार की तकनीकी बोली (technical bid) को खारिज करने और दूसरे ठेकेदार की बोली को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया की जांच की और मामले में हस्तक्षेप किया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मैसर्स जी.एच. खंडेलवाल एवं बनाम अमरावती नगर निगम अन्य से है। रिटेल एक पंजीकृत पंजीकृत फर्म है, जो स्ट्रीट निर्माण और कोचिंग के कार्य में लगी हुई है।
अमरावती नगर निगम ने 28 नवंबर 2025 को ₹1.59 करोड़ के सड़क मरम्मत कार्य के लिए ई-टेंडर जारी किया था। इसमें शहर के अलग-अलग ज़ोन में गड्ढों की मरम्मत और सड़कों के रखरखाव का काम शामिल था।
Read also:- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी की मेंटेनेंस अपील खारिज की, कहा-योग्य होने पर खुद निर्वाह करना होगा
याचिकाकर्ता ने समय पर अपनी बोली जमा की और दावा किया कि उसने पहले भी ऐसे कई काम पूरे किए हैं और उसके पास आवश्यक अनुभव और प्रमाण पत्र मौजूद हैं।
याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायत यह थी कि उसकी तकनीकी बोली को 15 दिसंबर 2025 को बिना उचित कारण के खारिज कर दिया गया।
इसके साथ ही, चौथे प्रतिवादी (एक अन्य ठेकेदार) की बोली को “responsive” मानते हुए आगे बढ़ा दिया गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि चौथे प्रतिवादी और उसके पिता की फर्म ने मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया, जो कि “cartelisation” (साठगांठ) के दायरे में आता है और कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया, पात्रता शर्तों और प्रस्तुत दस्तावेजों का विस्तार से परीक्षण किया।
बेंच ने कहा कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:
“टेंडर की शर्तों का पालन सभी प्रतिभागियों के लिए समान रूप से किया जाना चाहिए, और किसी भी बोली को खारिज करने का निर्णय स्पष्ट और न्यायसंगत कारणों पर आधारित होना चाहिए।”
कोर्ट ने यह देखा कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत कार्य अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों को किस आधार पर अस्वीकार किया गया, यह रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं था।
साथ ही, प्रतिवादी संख्या 4 की पात्रता और उसकी भागीदारी से जुड़े पहलुओं पर भी कोर्ट ने गंभीरता से विचार किया
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि चौथे प्रतिवादी और उसके पिता की फर्म ने मिलकर टेंडर में भाग लिया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया में वास्तविक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है, तो यह सार्वजनिक हित के खिलाफ होगा। हालांकि, इस पहलू का मूल्यांकन तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
23 अप्रैल 2026 को दिए गए अपने निर्णय में, जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस निवेदिता पी. मेहता की डिवीजन बेंच ने मामले का निपटारा करते हुए टेंडर प्रक्रिया में हुई कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा की।
कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में आवश्यक निर्देश जारी किए और याचिका का निपटारा किया।
Case Details
Case Title: M/s G.H. Khandelwal v. Amravati Municipal Corporation & Ors.
Case Number: Writ Petition No. 293 of 2026
Judges: Justice Urmila Joshi-Phalke & Justice Nivedita P. Mehta
Decision Date: 23 April 2026










