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गुवाहाटी हाई कोर्ट ने पति के नपुंसकता स्वीकार करने के बाद शादी रद्द की, पत्नी के खिलाफ क्रूरता का निष्कर्ष हटाया।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर दिए गए तलाक के आदेश को पलट दिया और हिंदू मैरिज एक्ट के तहत शादी को खत्म कर दिया। कोर्ट ने यह माना कि पति के नपुंसक होने (जिसे उसने खुद भी माना था) की वजह से शादी कभी पूरी नहीं हो पाई थी। - श्रीमती पापिया साहा रॉय बनाम श्री अमित विक्रम रॉय

CB News Desk
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने पति के नपुंसकता स्वीकार करने के बाद शादी रद्द की, पत्नी के खिलाफ क्रूरता का निष्कर्ष हटाया।

गौहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण वैवाहिक विवाद में फैमिली कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए पत्नी के खिलाफ दर्ज क्रूरता (Cruelty) के निष्कर्ष को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि पति द्वारा स्वयं नपुंसकता स्वीकार किए जाने और विवाह का कभी पूर्ण (Consummation) न होने की स्थिति में विवाह को उसी आधार पर निरस्त किया जाना चाहिए था।

मामले की पृष्ठभूमि

पति-पत्नी का विवाह 13 दिसंबर 2017 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। बाद में पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत क्रूरता और परित्याग (Desertion) के आधार पर तलाक की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट का रुख किया।

पत्नी ने इसका विरोध करते हुए प्रतिदावा (Counter Claim) दायर किया। उसका कहना था कि पति की नपुंसकता के कारण विवाह कभी पूर्ण नहीं हो सका। दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने का प्रयास भी हुआ, लेकिन वह सफल नहीं रहा।

इसके बाद फैमिली कोर्ट ने केवल क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद का आदेश पारित किया। पत्नी के प्रतिदावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि वह पति की नपुंसकता साबित नहीं कर सकी। इसी आदेश को पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के 13 जून 2024 के आदेश का अवलोकन किया। उस आदेश में दर्ज था कि पति ने स्वयं अदालत के समक्ष स्वीकार किया था कि वह नपुंसक है।

हाईकोर्ट ने पाया कि पति ने पत्नी के इस कथन का भी विरोध नहीं किया कि विवाह उसी कारण पूर्ण नहीं हो सका। सुनवाई के दौरान पति की ओर से भी यह आपत्ति नहीं की गई कि विवाह को इसी आधार पर समाप्त किया जाए। साथ ही यह भी स्वीकार किया गया कि पत्नी के खिलाफ क्रूरता का आधार कायम नहीं रह सकता।

पीठ ने कहा,

“रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पति ने स्वयं अपनी नपुंसकता स्वीकार की थी।” अदालत ने आगे कहा कि “चूंकि विवाह पति की नपुंसकता के कारण पूर्ण नहीं हो सका, इसलिए विवाह को उसी आधार पर समाप्त किया जाना उचित है।”

अदालत का फैसला

जस्टिस माइकल जोथनखुमा और जस्टिस राजेश मजूमदार की खंडपीठ ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा क्रूरता के आधार पर पारित विवाह विच्छेद के आदेश को निरस्त कर दिया।

अदालत ने निर्देश दिया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 12(1)(a) के तहत नया डिक्री जारी किया जाए और विवाह को इस आधार पर निरस्त माना जाए कि पति की नपुंसकता के कारण विवाह कभी पूर्ण नहीं हो सका।

इसके साथ ही अपील का निस्तारण कर दिया गया।

Case Details

Case Title: Smtpapiya Saha Roy v. Sri Amit Vikram Roy

Case Number: Mat. App. No. 31/2026

Judges: Justice Michael Zothankhuma and Justice Rajesh Mazumdar

Decision Date: 25 June 2026

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