मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष साक्ष्यों पर आधारित और उचित हों तो अपीलीय अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने ₹60,000 के चेक बाउंस मामले में आरोपी की बरी होने के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही माना। - राकेश कुमार बनाम सुनील खाची

Zaved Khan
ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष साक्ष्यों पर आधारित और उचित हों तो अपीलीय अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने ₹60,000 के चेक बाउंस मामले में शिकायतकर्ता द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी करने का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एक उचित और संभव दृष्टिकोण था, इसलिए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता।

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता राकेश कुमार का कहना था कि उन्होंने आरोपी सुनील खाची को व्यापारिक जरूरत के लिए ₹60,000 उधार दिए थे। आरोप के अनुसार, रकम लौटाने के लिए आरोपी ने एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक ने उसे “पर्याप्त धनराशि न होने” के कारण अस्वीकृत कर दिया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ, जिसके चलते धारा 138, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत शिकायत दर्ज की गई।

हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2012 में आरोपी को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ यह अपील दायर की गई थी।

न्यायमूर्ति राकेश कैन्थला ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया था कि वह आरोपी से पहली बार एक परिचित की दुकान पर मिला था और कथित तौर पर मात्र एक सप्ताह बाद उसे ₹60,000 उधार दे दिए थे।

अदालत ने कहा कि सामान्य मानवीय व्यवहार के आधार पर यह बात सहज रूप से स्वीकार करना कठिन है कि कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को इतनी बड़ी राशि उधार दे देगा, जिससे उसकी हाल ही में पहचान हुई हो।

पीठ ने यह भी नोट किया कि जिस व्यक्ति की दुकान पर दोनों की मुलाकात हुई थी, उसे गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया। अदालत ने माना कि उसकी गवाही शिकायतकर्ता के दावे की पुष्टि कर सकती थी।

निर्णय में कहा गया,

“यदि ट्रायल कोर्ट द्वारा अपनाया गया दृष्टिकोण एक संभावित और उचित दृष्टिकोण है, तो केवल इस आधार पर कि कोई दूसरा दृष्टिकोण भी संभव है, अपीलीय अदालत उसके निर्णय को पलट नहीं सकती।”

इन परिस्थितियों में हाई कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन किया था और आरोपी को बरी करने का निर्णय एक संभव एवं तर्कसंगत निष्कर्ष था। इसी आधार पर अदालत ने अपील खारिज कर दी और आरोपी की बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा।

Case Details:

Case Title: Rakesh Kumar v. Sunil Khachi

Case Number: Criminal Appeal No. 323 of 2012

Judge: Justice Rakesh Kainthla

Decision Date: 19 June 2026

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories