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मद्रास हाईकोर्ट ने कानून छात्रों को राहत देने वाला आदेश रद्द किया, 70% उपस्थिति नियम को बताया अनिवार्य

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के उपस्थिति नियमों में निर्धारित सीमा से अधिक छूट नहीं दी जा सकती और छात्रों को दी गई पूर्व राहत रद्द कर दी। - Registrar, Tamil Nadu Dr. Ambedkar Law University & Ors. vs B. Vadhanan & Ors. (Batch Matters)

Zaved Khan
मद्रास हाईकोर्ट ने कानून छात्रों को राहत देने वाला आदेश रद्द किया, 70% उपस्थिति नियम को बताया अनिवार्य

मद्रास हाईकोर्ट ने कानून की पढ़ाई कर रहे तीन छात्रों को उपस्थिति की कमी के बावजूद परीक्षा देने और आगे की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा तय न्यूनतम उपस्थिति नियमों में न्यायालय अतिरिक्त छूट नहीं दे सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी और उसके स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन लॉ द्वारा दायर अपीलों से जुड़ा था। छात्रों की उपस्थिति निर्धारित न्यूनतम सीमा से कम थी, जिसके कारण विश्वविद्यालय ने उन्हें सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं दी थी।

इसके बाद छात्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिसंबर 2025 में एकल न्यायाधीश ने आंशिक राहत देते हुए छात्रों को आगे के सेमेस्टर में पढ़ाई जारी रखने और बाद में उपस्थिति की कमी पूरी करने का अवसर देने का निर्देश दिया था।

अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि BCI नियमों के अनुसार कानून के छात्रों के लिए 70% उपस्थिति अनिवार्य है। विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 5% की छूट दी जा सकती है, जिससे न्यूनतम सीमा 65% तक आती है, लेकिन इससे अधिक राहत नहीं दी जा सकती।

पीठ ने कहा,

“नियम स्पष्ट हैं और इससे अधिक छूट देने से नियम का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।”

अदालत ने यह भी कहा कि नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने वाले छात्रों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना आवश्यक है। केवल कुछ छात्रों को अतिरिक्त राहत देना समानता के सिद्धांत के विपरीत होगा।

कानूनी शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए पीठ ने कहा,

“ऑनलाइन कक्षाएं आवश्यकता पड़ने पर सीखने का एक माध्यम हो सकती हैं, लेकिन वे भौतिक कक्षाओं का विकल्प नहीं बन सकतीं।”

अदालत ने आगे कहा कि कक्षा में होने वाली चर्चाएं, बहस और संवाद कानून के छात्रों के बौद्धिक और नैतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) या ChatGPT जैसे उपकरण योग्य शिक्षकों की भूमिका का स्थान नहीं ले सकते।

फैसला

खंडपीठ ने सभी तीनों रिट अपीलों को स्वीकार करते हुए 17 दिसंबर 2025 के एकल न्यायाधीश के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने माना कि BCI नियमों में निर्धारित सीमा से अधिक उपस्थिति छूट नहीं दी जा सकती और विश्वविद्यालय का निर्णय वैध है। मामले में कोई लागत नहीं लगाई गई।

Case Details:

Case Title: Registrar, Tamil Nadu Dr. Ambedkar Law University & Ors. vs B. Vadhanan & Ors. (Batch Matters)

Case Number: WA No. 49 of 2026, WA No. 364 of 2026 and WA No. 426 of 2026

Judge: Justice S.M. Subramaniam and Justice N. Senthilkumar

Decision Date: June 17, 2026

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