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Google Ads को लेकर DRS Logistics की शिकायत पर हाईकोर्ट का फैसला, अवमानना याचिका खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने DRS Logistics की Google के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पहले के आदेशों के जानबूझकर उल्लंघन का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। - M/s DRS Logistics (P) Ltd. & Another v. Google India Pvt. Ltd. & Ors.

Zaved Khan
Google Ads को लेकर DRS Logistics की शिकायत पर हाईकोर्ट का फैसला, अवमानना याचिका खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने DRS Logistics Pvt. Ltd. द्वारा Google India Pvt. Ltd. और अन्य के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने माना कि पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों के जानबूझकर उल्लंघन का मामला स्थापित नहीं हो सका।

न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने 15 जून 2026 को M/s DRS Logistics (P) Ltd. & Another v. Google India Pvt. Ltd. & Ors., CS(COMM) 1/2017 में यह फैसला सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद DRS Logistics के ट्रेडमार्क—“Agarwal”, “Aggarwal Packers and Movers” और “DRS Logistics”—से जुड़ा है। कंपनी ने पहले आरोप लगाया था कि उसके ट्रेडमार्क का उपयोग ऑनलाइन विज्ञापनों में किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा सकता है।

अक्टूबर 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट ने Google को निर्देश दिया था कि यदि कंपनी की ओर से शिकायत की जाती है तो वह संबंधित विज्ञापनों की जांच करे और यदि ट्रेडमार्क उल्लंघन पाया जाए तो ऐसे विज्ञापनों को हटाए या ब्लॉक करे। अगस्त 2023 में डिवीजन बेंच ने भी इन निर्देशों को बरकरार रखा था।

इसके बाद DRS Logistics ने दावा किया कि उसके ट्रेडमार्क से जुड़े सर्च करने पर तीसरे पक्ष के प्रायोजित विज्ञापन अब भी दिखाई दे रहे थे। इसी आधार पर कंपनी ने Google के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि Google ने तीसरे पक्षों को उनके ट्रेडमार्क का उपयोग विज्ञापनों के शीर्षक, टेक्स्ट और URL में करने दिया, जो पहले अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासनों के विपरीत था।

वहीं Google ने अदालत को बताया कि पूर्व आदेशों में उसे केवल शिकायत मिलने पर जांच करने का निर्देश दिया गया था। कंपनी ने कहा कि उस पर सभी विज्ञापनों की पहले से निगरानी करने की कोई बाध्यता नहीं डाली गई थी।

Google ने यह भी कहा कि उसकी नीतियां पहले से ही ट्रेडमार्क संबंधी शिकायतों की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई का प्रावधान करती हैं।

न्यायमूर्ति कारिया ने पूर्व के आदेशों और फैसलों का विश्लेषण करते हुए कहा कि उनके मुख्य निर्देश केवल ट्रेडमार्क को “कीवर्ड” के रूप में उपयोग किए जाने से संबंधित थे।

अदालत ने कहा,

“पूर्व निर्णयों में जारी निर्देशों का दायरा केवल संबंधित ट्रेडमार्क के कीवर्ड के रूप में उपयोग तक सीमित था।”

कोर्ट ने पाया कि पहले की कार्यवाही के दौरान स्वयं वादियों ने विवाद को इस प्रश्न तक सीमित कर दिया था कि किसी ट्रेडमार्क को कीवर्ड के रूप में उपयोग करना उल्लंघन माना जाएगा या नहीं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व आदेशों में Google पर यह दायित्व नहीं डाला गया था कि वह बिना किसी शिकायत के स्वतः सभी विज्ञापनों की निगरानी करे और उनमें ट्रेडमार्क के उपयोग को रोके।

फैसला

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि Google या अन्य प्रतिवादियों ने अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की हो।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जिन विज्ञापनों और URLs को लेकर शिकायत की गई थी, उन्हें शिकायत मिलने के बाद हटा दिया गया था।

इन परिस्थितियों में न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने माना कि अवमानना का मामला नहीं बनता और याचिका को खारिज कर दिया।

Case Details:

Case Title: M/s DRS Logistics (P) Ltd. & Another v. Google India Pvt. Ltd. & Ors.

Case Number: CS(COMM) 1/2017

Judge: Justice Tejas Karia

Decision Date: June 15, 2026

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