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सिर्फ साइबर शिकायतों के आधार पर खाता फ्रीज नहीं कर सकते बैंक: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक किसान के पोस्ट ऑफिस खाते पर लगी रोक हटाने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि बिना नोटिस, कारण और वैध कानूनी आदेश के खाता फ्रीज रखना उचित नहीं है। - Kanakati Naresh v. Union of India & Others

Zaved Khan
सिर्फ साइबर शिकायतों के आधार पर खाता फ्रीज नहीं कर सकते बैंक: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक किसान के बैंक खाते पर लगी रोक हटाने का निर्देश देते हुए कहा है कि किसी नागरिक का बैंक खाता केवल साइबर अलर्ट या आंतरिक पत्राचार के आधार पर अनिश्चितकाल तक फ्रीज नहीं रखा जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई के लिए कानून के तहत वैध अधिकार और उचित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता कनकाटी नरेश ने अदालत को बताया कि उनका एक बचत खाता पोस्ट ऑफिस में था। उन्होंने अपनी कपास की फसल को कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) को बेचा था, जिसके बदले उन्हें ₹1,50,228 प्राप्त होने थे।

23 जनवरी 2024 को यह राशि उनके खाते में जमा भी हो गई। लेकिन जब वे 13 फरवरी 2024 को रकम निकालने पोस्ट ऑफिस पहुंचे, तो अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनका खाता साइबर क्राइम विभाग के निर्देशों पर फ्रीज कर दिया गया है।

नरेश का कहना था कि खाते को फ्रीज करने से पहले उन्हें कोई नोटिस, आदेश या कारण नहीं बताया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खाते को फ्रीज करने के आधार से संबंधित दस्तावेज़ मांगने पर भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए।

बैंक का पक्ष

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने अदालत को बताया कि खाते पर डेबिट फ्रीज राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर लगाया गया था।

बैंक के अनुसार गुजरात, केरल और महाराष्ट्र की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई थीं। बैंक ने कहा कि उसने संभावित धोखाधड़ी वाले लेन-देन को रोकने और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए सद्भावना में कार्रवाई की।

बैंक ने यह भी कहा कि उसे किसी जांच एजेंसी से फ्रीज हटाने का निर्देश प्राप्त नहीं हुआ था।

अदालत की टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह जांच की कि क्या बिना किसी औपचारिक कानूनी आदेश के खाते पर लगी रोक को जारी रखा जा सकता है।

न्यायमूर्ति भीमापाका ने कहा, “किसी नागरिक का बैंक खाता केवल आंतरिक पत्राचार, पोर्टल अलर्ट या अनौपचारिक इलेक्ट्रॉनिक संचार के आधार पर अनिश्चितकाल तक फ्रीज नहीं किया जा सकता, जब तक कि ऐसी कार्रवाई कानून द्वारा अधिकृत न हो।”

अदालत ने कहा कि बैंक खाते में मौजूद धन खाताधारक की संपत्ति है और उस पर रोक लगने से उसकी आजीविका तथा वैध धन तक पहुंच प्रभावित होती है।

पीठ ने यह भी कहा कि भले ही आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जाए, लेकिन बाद में खाताधारक को कारण और आवश्यक जानकारी देना जरूरी है।

अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता का यह दावा कि खाते में जमा राशि कृषि उपज की बिक्री से प्राप्त हुई थी, उसका विशेष रूप से खंडन नहीं किया गया।

फैसला

हाईकोर्ट ने रिट याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खाते पर जारी डेबिट फ्रीज बिना नोटिस, बिना कारण और बिना किसी सक्षम प्राधिकारी के आदेश के जारी रखा गया, जो कानून की दृष्टि में टिकाऊ नहीं है।

अदालत ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर खाते को डी-फ्रीज कर सामान्य लेन-देन की अनुमति दी जाए।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने साइबर शिकायतों या उनसे संबंधित जांच के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। यदि कोई सक्षम जांच एजेंसी कानून के अनुसार नया आदेश जारी करती है, तो बैंक उस पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

Case Details:

Case Title: Kanakati Naresh v. Union of India & Others

Case Number: Writ Petition No. 38841 of 2025

Judge: Justice Nagesh Bheemapaka

Decision Date: May 6, 2026

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