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मुंबई कोस्टल रोड गार्डन प्रोजेक्ट: सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी को संशोधित मास्टर प्लान पर विचार की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई कोस्टल रोड गार्डन परियोजना के संशोधित मास्टर लेआउट पर बीएमसी को विचार करने की अनुमति दी, साथ ही सार्वजनिक पहुंच और सीमित व्यावसायिक उपयोग संबंधी शर्तों को बरकरार रखा। - Jipnesh Narendra Jain v. State of Maharashtra & Ors.

Zaved Khan
मुंबई कोस्टल रोड गार्डन प्रोजेक्ट: सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी को संशोधित मास्टर प्लान पर विचार की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई कोस्टल रोड गार्डन और प्रोमेनेड परियोजना के संशोधित मास्टर लेआउट प्लान पर विचार करने की राह साफ कर दी है। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को निर्देश दिया कि वह प्रस्तावित लेआउट का परीक्षण करे, बशर्ते यह अदालत के पहले दिए गए निर्देशों का उल्लंघन न करे।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने 11 जून 2026 को यह आदेश पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला जिपनेश नरेंद्र जैन बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य से जुड़ा है। आवेदक ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दाखिल कर यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि संशोधित मास्टर लेआउट और कॉन्सेप्ट डिज़ाइन अदालत के 12 जनवरी 2026 के फैसले के अनुरूप है। साथ ही परियोजना के विस्तृत डिजाइन को अंतिम रूप देने और आवश्यक अनुमतियों के बाद काम आगे बढ़ाने की अनुमति भी मांगी गई थी।

सुनवाई के दौरान बताया गया कि जनवरी 2026 के फैसले के बाद प्रस्ताव को बीएमसी की लैंडस्केपिंग कमेटी के समक्ष रखा गया था। समिति ने 19 मई 2026 की बैठक में इस पर चर्चा की और सिद्धांततः योजना पर विचार करने की सहमति जताई थी। हालांकि कुछ प्रस्तावित गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी को आवश्यक माना गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 12 जनवरी 2026 के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि परियोजना का क्षेत्र आम जनता के लिए खुला और सुलभ रहना चाहिए।

पीठ ने अपने पूर्व आदेश का हवाला देते हुए कहा, “यह क्षेत्र आम जनता के स्वतंत्र उपयोग के लिए सुलभ होना चाहिए।”

अदालत ने यह भी दोहराया कि सीमित क्षेत्र में ऐसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं जो आगंतुकों को आकर्षित करें या मनोरंजन संबंधी गतिविधियों के लिए उपयोगी हों, लेकिन इससे सार्वजनिक पहुंच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

साथ ही अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि संबंधित भूमि पर बिक्री या लीज के लिए किसी प्रकार का आवासीय या व्यावसायिक विकास अनुमत नहीं होगा।

रिकॉर्ड के अनुसार, बीएमसी की लैंडस्केपिंग कमेटी ने चर्चा के दौरान माना था कि योजना संबंधी कार्य आगे बढ़ाए जा सकते हैं। समिति ने यह भी विचार किया कि कुछ मनोरंजक या टिकट आधारित गतिविधियों के लिए अलग से आवश्यक अनुमति ली जानी चाहिए।

कमेटी की चर्चा में यह भी सामने आया कि परियोजना क्षेत्र के अधिकतम 15 प्रतिशत हिस्से का उपयोग मनोरंजक सुविधाओं या नियंत्रित प्रवेश वाली गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवेदन के साथ प्रस्तुत संशोधित मास्टर लेआउट प्लान (अनुबंध-A2) पर बीएमसी विचार कर सकती है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि इससे 12 जनवरी 2026 के आदेश का उल्लंघन न हो।

पीठ ने कहा कि आवेदक ऐसी कोई गतिविधि नहीं करेगा जो अदालत के पूर्व आदेश के विपरीत हो।

सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया कि परियोजना क्षेत्र के 15 प्रतिशत से अधिक हिस्से का उपयोग मनोरंजक गतिविधियों या टिकट आधारित प्रवेश व्यवस्था के लिए नहीं किया जाएगा।

इन टिप्पणियों और निर्देशों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टीकरण संबंधी आवेदन का निस्तारण कर दिया।

Case Details:

Case Title: Jipnesh Narendra Jain v. State of Maharashtra & Ors.

Case Number: Miscellaneous Application No. 1864/2026 in W.P.(C) No. 1166/2025

Judge: Justice Prashant Kumar Mishra and Justice Atul S. Chandurkar

Decision Date: 11 June 2026

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