इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आपराधिक रिट याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पारिवारिक विवाद को आधार बनाकर गंभीर और असत्य आरोप लगाना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला शिवराम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता, जो स्वयं पेश हुए, ने अपनी पत्नी और बेटियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने पुलिस को कुछ डिजिटल सामग्री-वीडियो, फोटो और स्क्रीनशॉट-सौंपते हुए दावा किया कि उनके परिवार का संबंध कथित “सेक्स रैकेट” से है।
अदालत ने पहले इस मामले को सुलह के लिए मध्यस्थता केंद्र भेजा था, ताकि परिवार को आपसी मतभेद सुलझाने का मौका मिल सके। हालांकि, मध्यस्थता रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि सुलह की कोई संभावना नहीं है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता खुद को “नैतिकता का ठेकेदार” मानते हैं और अपने परिवार के खिलाफ “अत्यंत आपत्तिजनक और आधारहीन आरोप” लगा रहे हैं।
पीठ ने कहा,
“यह याचिका एक पारिवारिक विवाद से संबंधित है, और इसमें ‘सेक्स रैकेट’ जैसे आरोप जोड़ना अत्यंत अनुचित तरीका है।”
डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए पुलिस ने सामग्री को आईआईटी कानपुर के C3iHub(Cybersecurity and Cybersecurity of Cyber-Physical Systems) को भेजा। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि प्रस्तुत तस्वीरों और वीडियो में कोई सीधा मेल नहीं है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि संबंधित मीडिया फाइलें लगभग 10–12 वर्ष पुरानी हैं और उपलब्ध साक्ष्य “गलत या भ्रामक पहचान” की ओर इशारा करते हैं।
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अदालत ने इस रिपोर्ट के आधार पर कहा,
“याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप झूठ का पुलिंदा प्रतीत होते हैं।”
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे “खोखले आरोपों” के आधार पर पुलिस को जांच या एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
पीठ ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप “अत्यंत स्कैंडलस” हैं और कुछ को हटाए जाने योग्य माना। अंततः, न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया।
Case Details
Case Title: Shivram vs State of U.P. and 3 Others
Case Number: Criminal Misc. Writ Petition No. 23014 of 2025
Judge: Justice J.J. Munir, Justice Vinai Kumar Dwivedi
Decision Date: 7 April 2026










