भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक अहम जजमेंट में तीन आरोपियों की हत्या (धारा 302 आईपीसी) के आरोप से जुड़े मामले में दोषी ठहराया है। हालाँकि, अदालत ने उनके खिलाफ़ (धारा 498ए आईपीसी) की सजा सुनाई।
यह निर्णय अरविन्द कुमार की पृच्छा द्वारा स्वीकार किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला एक महिला की मृत्यु से जुड़ा है, जिसकी शादी 12 जुलाई 2000 को नागेंद्र सिंह से हुई थी। अभियोजन के अनुसार, शादी के बाद महिला को दहेज को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाता था।
इस मामले में पति नागेंद्र सिंह, ससुर नरेंद्र सिंह और सास लीला सिंह पर हत्या (धारा 302 IPC) और क्रूरता (धारा 498A IPC) के आरोप लगाए गए थे। ट्रायल कोर्ट ने तीनों को दोषी ठहराया था।
बाद में, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के आरोप से तीनों को बरी कर दिया, लेकिन क्रूरता के अपराध में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा को “पहले से भुगती अवधि” तक सीमित कर दिया और 1000 रुपये का जुर्माना लगाया।
सुप्रीम कोर्ट के सामने तीन अलग-अलग अपीलें आईं:
- नरेंद्र सिंह (ससुर) ने अपनी 498A की सजा को चुनौती दी
- मृतका के भाई ने हत्या के आरोप से बरी किए जाने को चुनौती दी
- राज्य सरकार ने भी 302 IPC के तहत बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर की
इन सभी अपीलों को एक साथ सुनवाई के लिए लिया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सबूतों और गवाहों के बयानों का विस्तार से विश्लेषण किया।
पीठ ने पाया कि:
- हत्या (धारा 302 IPC) के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद नहीं थे
- अभियोजन पक्ष हत्या की कहानी को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा
अदालत ने स्पष्ट कहा:
“रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य हत्या के आरोप को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।”
हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि:
- महिला के साथ शादी के बाद मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न हुआ था
- गवाहों के बयान और परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि दहेज को लेकर क्रूरता की गई
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा:
- हाईकोर्ट द्वारा धारा 302 IPC के तहत आरोपियों को बरी करना सही है
- इस बरी किए जाने में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है
- धारा 498A IPC के तहत दोषसिद्धि सही और उचित है
अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सजा (पहले से भुगती अवधि) और जुर्माना यथावत रहेगा।
Case Details
Case Title: Narendra Singh vs State of Madhya Pradesh & Connected Appeals
Case Number: Criminal Appeal Nos. 302, 307 & 309 of 2014
Judges: Justice Aravind Kumar & Justice N.V. Anjaria
Decision Date: April 30, 2026











