नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में पदोन्नति से जुड़े लंबे विवाद पर अहम फैसला सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार के उस आदेश को फिर से लागू कर दिया, जिसे मद्रास हाई कोर्ट ने पहले रद्द कर दिया था। इस फैसले से संबंधित कर्मचारी को बड़ी राहत मिली है।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला वर्ष 2005 के एक सरकारी आदेश से जुड़ा था, जिसमें सेवा नियमों में छूट देकर टी. ज्ञानवेल को सहायक अभियंता (Assistant Engineer) पद पर पदोन्नति दी गई थी। यह पदोन्नति 1997 से प्रभावी मानी गई थी, जबकि आर्थिक लाभ 1998 से दिए गए थे।
इस आदेश को आर. ससिप्रिया ने चुनौती दी थी। उनका कहना था कि पदोन्नति प्रक्रिया में तय अनुपात (3:1) का पालन नहीं किया गया और इससे उनके अधिकार प्रभावित हुए।
शुरुआत में एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने अपील स्वीकार करते हुए सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ राज्य सरकार और संबंधित कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की विस्तार से सुनवाई की और सेवा नियमों में दी गई छूट तथा पदोन्नति प्रक्रिया पर विचार किया।
अदालत ने कहा कि देरी से किए गए दावों को स्वीकार करना उचित नहीं है, खासकर तब जब बीच में अन्य कर्मचारियों के अधिकार तय हो चुके हों।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग लंबे समय तक अपने अधिकारों के लिए कदम नहीं उठाते और बाद में दावा करते हैं, उन्हें राहत देना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की,
“ऐसे मामलों में, जहां वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े अधिकार पहले ही तय हो चुके हों, देर से किए गए दावे स्वीकार नहीं किए जा सकते।”
अदालत ने यह भी माना कि संबंधित कर्मचारी को दी गई पदोन्नति नियमों के अनुरूप थी और उसे अनुचित नहीं कहा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के 23 जुलाई 2024 के फैसले और 4 अक्टूबर 2024 के समीक्षा आदेश को रद्द कर दिया।
अदालत ने राज्य सरकार का 18 जनवरी 2005 का आदेश बहाल करते हुए कहा कि टी. ज्ञानवेल को दी गई पदोन्नति वैध है। साथ ही, उनके बाद में हुए पदोन्नति-सहायक कार्यकारी अभियंता (Assistant Executive Engineer) और कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer)-को भी सही ठहराया गया।
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कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित कर्मचारी को भविष्य में पदोन्नति का लाभ उस तारीख से दिया जाएगा, जब वह इसके लिए पात्र हुआ।
इसी के साथ सभी अपीलें स्वीकार कर ली गईं और लंबित आवेदन भी निपटा दिए गए। अदालत ने मामले में किसी प्रकार की लागत (cost) नहीं लगाई।
Case Details:
Case Title: The State of Tamil Nadu & Anr. vs R. Sasipriya & Anr.
Case Number: Civil Appeal Nos. 6883–6886 of 2026
Judge: Justice R. Mahadevan and Justice Ahsanuddin Amanullah
Decision Date: May 4, 2026











