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सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, मेघालय हाईकोर्ट के आदेश पर जताई गंभीर आपत्तियां

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि वह पहले ही रिहा हो चुकी हैं। हालांकि अदालत ने मेघालय हाईकोर्ट के फैसले पर प्रथम दृष्टया गंभीर आपत्तियां भी दर्ज कीं। - मेघालय राज्य बनाम सोनम रघुवंशी @ बिट्टी @ बिट्टू

CB News Desk
सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, मेघालय हाईकोर्ट के आदेश पर जताई गंभीर आपत्तियां

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (3 जुलाई) को राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि मेघालय हाईकोर्ट द्वारा जमानत बरकरार रखने के तरीके पर उसे प्रथम दृष्टया गंभीर आपत्तियां हैं। इसके बावजूद कोर्ट ने कहा कि चूंकि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं, इसलिए इस स्तर पर उन्हें दोबारा हिरासत में भेजने का अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ मेघालय सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मेघालय हाईकोर्ट के 29 जून 2026 के फैसले को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत को बरकरार रखा था।

अभियोजन के अनुसार, इंदौर निवासी व्यवसायी राजा रघुवंशी की मई 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या हुई थी। इस मामले में सोनम रघुवंशी मुख्य आरोपी हैं। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अभी ट्रायल कोर्ट में होना बाकी है।

मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल एक टाइपिंग त्रुटि के आधार पर जमानत को सही ठहरा दिया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी से जुड़े एक दस्तावेज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के स्थान पर गलती से धारा 403 लिख दी गई थी।

राज्य का कहना था कि यह मात्र टाइपोग्राफिकल त्रुटि थी और इससे आरोपी को किसी प्रकार की वास्तविक कानूनी हानि नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि सोनम की पहले की तीन जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं और उन अवसरों पर गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी न दिए जाने का मुद्दा कभी नहीं उठाया गया था।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को लेकर अदालत के मन में प्रथम दृष्टया गंभीर संदेह हैं।

पीठ ने कहा, "प्रथम दृष्टया हमें इस बात पर गंभीर आपत्तियां हैं कि हाईकोर्ट ने इस मामले को किस प्रकार से देखा।"

अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल न बताना और किसी दस्तावेज में गलत धारा का उल्लेख होना दोनों स्थितियां अलग-अलग हैं। यदि तथ्यों की जानकारी आरोपी को दी गई थी, तो केवल धारा का गलत उल्लेख अपने आप में हर मामले में जमानत का आधार नहीं बन सकता।

पीठ ने बताया कि शुरुआत में वह जमानत पर रोक लगाने पर विचार कर रही थी, लेकिन बाद में जानकारी मिली कि सोनम रघुवंशी पहले ही रिहा हो चुकी हैं।

इस पर अदालत ने कहा, "यदि वह पहले ही रिहा हो चुकी हैं, तो इस स्तर पर उन्हें दोबारा हिरासत में भेजने का अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता।"

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि किसी भी आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक उसका अपराध न्यायालय में सिद्ध न हो जाए। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्य और अभियोजन के आरोपों की जांच ट्रायल के दौरान होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी करते हुए चार दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही मेघालय सरकार को अतिरिक्त दस्तावेज और चार्जशीट के प्रासंगिक हिस्से रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी गई है।

मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई 2026 को होगी।

Case Details

Case Title: State of Meghalaya v. Sonam Raghuvanshi @ Bitti @ Bittu

Case Number: SLP (Crl.) No. 11944 of 2026

Judge: Justice M.M. Sundresh and Justice Sheel Nagu

Decision Date: July 3, 2026

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