रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलापाड को बड़ी राहत दी है। अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ दर्ज रेलवे एक्ट की धाराओं के लिए आवश्यक कानूनी तत्व रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
यह आदेश 9 फरवरी 2026 को जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने पारित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला 27 जुलाई 2022 का है। आरोप था कि कांग्रेस पार्टी के कुछ कार्यकर्ता व्हाइटफील्ड रेलवे स्टेशन, बेंगलुरु के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।
रिकॉर्ड के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन संख्या 01773 (बंगारपेट–केएसआर बेंगलुरु) के सामने बैठकर नारेबाजी की, जिससे ट्रेन करीब 39 मिनट तक रुकी रही।
स्टेशन मास्टर की सूचना पर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने मामला दर्ज किया। इसके बाद जांच के बाद पुलिस ने रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 145(c), 147, 154 और 174(a) के तहत चार्जशीट दायर की।
मामला बाद में XLI अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट, बेंगलुरु में विचाराधीन हो गया।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने अदालत को बताया कि आरोपों में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि प्रदर्शन से यात्रियों की सुरक्षा को खतरा हुआ या रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
वकील ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने केवल ट्रैक के सामने बैठकर विरोध दर्ज कराया था, जिससे ट्रेन थोड़ी देर के लिए रुकी।
अदालत में यह दलील दी गई कि ऐसी परिस्थितियों में रेलवे एक्ट की धारा 154 (जो यात्रियों की सुरक्षा को खतरे से जुड़ी है) लागू नहीं होती।
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मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने रिकॉर्ड और चार्जशीट का अवलोकन किया। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने का आदेश पर्याप्त रूप से कारणों पर आधारित नहीं था।
पीठ ने टिप्पणी की:
“रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं होता कि आरोपित कृत्य से यात्रियों की सुरक्षा को कोई खतरा हुआ या रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचा।”
अदालत ने यह भी कहा कि चार्जशीट और शिकायत में उन धाराओं के आवश्यक तत्व दिखाई नहीं देते जिनके तहत अभियोजन चलाया गया।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें समान परिस्थितियों में रेलवे ट्रैक अवरोध के आरोपों का परीक्षण किया गया था।
सभी तथ्यों और रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज आरोपों के लिए आवश्यक कानूनी आधार मौजूद नहीं है।
अदालत ने कहा कि ऐसे में मुकदमे को जारी रखना उचित नहीं होगा।
इसलिए न्यायालय ने आदेश दिया:
“याचिका स्वीकार की जाती है और C.C. No.32925/2022 में याचिकाकर्ता के खिलाफ लंबित कार्यवाही को रद्द किया जाता है।”
Case Title:- Mohammed Haris Nalapad vs State by SGWF Post Police Station (RPF)
Case Number:- Writ Petition No. 32 of 2026 (GM-RES)
Date of Judgment:- 9 February 2026










