मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के आरोपी स्कूल केयरटेकर की जमानत रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के आरोपी स्कूल केयरटेकर की जमानत रद्द की, ट्रायल कोर्ट के फैसले को बताया त्रुटिपूर्ण। - राज्य बनाम ललित कुमार और संबंधित मामला

Shivam Y.
दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के आरोपी स्कूल केयरटेकर की जमानत रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने जनकपुरी के एक जूनियर स्कूल में पढ़ने वाली तीन साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार स्कूल केयरटेकर की जमानत रद्द कर दी है। जस्टिस विनोद कुमार ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते समय कई अहम तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया, जिसमें बच्ची द्वारा आरोपी की पहचान और उस दिन स्कूल में मौजूद पुरुष स्टाफ की सीमित संख्या जैसे तथ्य शामिल हैं।

कोर्ट ने आरोपी को 1 जुलाई 2026 को संबंधित पॉक्सो कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 30 अप्रैल 2026 की घटना से जुड़ा है, जब पीड़िता, जिसे महज दो दिन पहले ही नर्सरी क्लास में दाखिला मिला था, उसकी मां उसे स्कूल छोड़कर आई थीं। उसी दिन, घर लौटकर सोकर उठने के बाद बच्ची रोने लगी और अपने प्राइवेट पार्ट की तरफ इशारा करते हुए दर्द की शिकायत करने लगी।

बच्ची ने अपनी मां को बताया कि स्कूल में मौजूद "बड़ा सा लड़का" उसे नीचे ले गया था और उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ था, जिससे दर्द और ब्लीडिंग हुई। मां ने उसी रात इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल किया, जिसके बाद जनकपुरी थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

अगले दिन बच्ची ने थाने में आरोपी की पहचान उस व्यक्ति के रूप में की, जो उसे बेसमेंट में ले गया था। जांच में सामने आया कि घटना के समय स्कूल परिसर में लगे करीब 64 सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे, हालांकि एक चालू पोर्टेबल कैमरे की फुटेज में आरोपी सुबह करीब 8:13 बजे जूनियर विंग की तरफ जाते और 8:37 बजे वापस आते हुए दिखा।

आरोपी को उसी शाम गिरफ्तार कर लिया गया था। एडिशनल सेशन जज (पॉक्सो), द्वारका कोर्ट्स ने गिरफ्तारी के महज एक हफ्ते बाद, 7 मई 2026 को उसे नियमित जमानत दे दी थी।

एडिशनल सेशन जज ने मुख्य रूप से सीसीटीवी फुटेज पर भरोसा किया था, जिसमें आरोपी सुबह 8:37 बजे जूनियर विंग से निकलकर सीनियर विंग में जाता दिख रहा था। ट्रायल कोर्ट ने यह भी नोट किया था कि मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर कोई चोट या लालिमा नहीं मिली थी, और आरोपी जांच में सहयोग कर रहा था तथा उसके फरार होने की आशंका नहीं थी।

हाईकोर्ट की टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने इस तर्क से असहमति जताई। जस्टिस कुमार ने बताया कि जूनियर स्कूल के दस स्टाफ सदस्यों में से केवल दो पुरुष थे आरोपी और एक सिक्योरिटी गार्ड जिससे बच्ची की पहचान को अहम माना जाना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि महज तीन साल की बच्ची से किसी वयस्क जैसी सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती, और बच्ची की बात में असंगति का मतलब यह नहीं कि वह झूठ बोल रही है।

बेंच ने यह भी रेखांकित किया कि बच्ची ने पहले अपनी मां को बिना किसी का नाम लिए घटना बताई थी, और बाद में ही आरोपी और घटनास्थल दोनों की पहचान की जिसे ट्रायल कोर्ट ने पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

चोट के निशान न मिलने के बिंदु पर कोर्ट ने कहा कि इससे अभियोजन पक्ष का मामला खारिज नहीं हो जाता, खासकर तब जब जांच अब भी जारी है और फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट आना बाकी है।

एक हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए, जो इसी तरह के पॉक्सो जमानत मामले से जुड़ा था, हाईकोर्ट ने दोहराया कि मेडिकल पुष्टि न होना अकेले ऐसे मामलों में निर्णायक आधार नहीं बन सकता, जहां कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान करता है।

फैसला

ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए जस्टिस कुमार ने कहा कि जांच के अहम चरण में जमानत देना जल्दबाजी थी। हाईकोर्ट ने राज्य और पीड़िता की मां, दोनों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए आरोपी को 1 जुलाई 2026 दोपहर 2 बजे तक पॉक्सो कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया।

Case Details

Case Title: State v. Lalit Kumar & Connected Matter

Judge: Justice Vinod Kumar

Decision Date: June 29, 2026

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories