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ट्रांसजेंडर पहचान और शैक्षणिक रिकॉर्ड पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा स्पष्ट रुख

दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर पहचान से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार से जवाब मांगा, शैक्षणिक और अन्य सरकारी दस्तावेजों पर प्रभाव को देखते हुए सुनवाई जारी। - रिया शर्मा बनाम भारत संघ और अन्य तथा संबंधित मामले

Vivek G.
ट्रांसजेंडर पहचान और शैक्षणिक रिकॉर्ड पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा स्पष्ट रुख

दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। मामला मुख्य रूप से शैक्षणिक रिकॉर्ड में पहचान और नाम दर्ज करने के तरीके से जुड़ा है, जिसका असर अन्य सरकारी दस्तावेजों पर भी पड़ सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिकाएं विभिन्न छात्रों द्वारा दायर की गई हैं, जिनमें उन्होंने अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में पहचान और नाम के सही उल्लेख को लेकर दिशा-निर्देश मांगे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय और बोर्ड जैसे संस्थानों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान को लेकर स्पष्ट नीति नहीं है।

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सुनवाई के दौरान केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से अधिवक्ता ने अदालत के सामने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े संशोधन कानून, 2026 का उल्लेख किया। इसमें “ट्रांसजेंडर व्यक्ति” की परिभाषा को संशोधित किया गया है।

पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल शैक्षणिक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अन्य आधिकारिक दस्तावेजों पर भी पड़ सकता है।

अदालत ने यह भी नोट किया कि संशोधन अधिनियम अभी अधिसूचित नहीं हुआ है। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि

“संशोधन लागू न होने के बावजूद, याचिकाकर्ता वर्तमान परिभाषा के तहत भी ट्रांसजेंडर की श्रेणी में आते हैं।”

वहीं, CBSE की ओर से दलील दी गई कि संशोधित परिभाषा के अनुसार, अलग-अलग यौन अभिविन्यास और स्वयं की पहचान रखने वाले व्यक्तियों को ट्रांसजेंडर की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।

मामले में व्यापक प्रभाव को देखते हुए अदालत ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) के सचिव को पक्षकार बनाने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार का स्पष्ट रुख जानना जरूरी है ताकि सभी संबंधित दस्तावेजों के लिए एक समान दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकें।

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पीठ ने निर्देश दिया कि:

  • मंत्रालय छह सप्ताह के भीतर अपना पक्ष हलफनामे के रूप में दाखिल करे।
  • यदि आवश्यक हो, तो अन्य मंत्रालयों से भी राय ली जाए।
  • सभी पक्ष अगली सुनवाई से पहले अपने लिखित तर्क प्रस्तुत करें।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 के लिए सूचीबद्ध की है और तब तक केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

Case Details:

Case Title: Riya Sharma vs Union of India & Ors. and connected matters

Case Number: W.P.(C) 6595/2017 & connected petitions

Judge: Justice Prathiba M. Singh and Justice Madhu Jain

Decision Date: April 9, 2026

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