मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में Instagram पर अपलोड किए गए एक रील के आधार पर दर्ज मामले में दो आरोपियों को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध नहीं होते।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला M.Cr.C. No. 13867/2026 का है, जिसमें वसीम खान और अन्य के खिलाफ थाना कोतवाली, जिला रायसेन में FIR दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसने Instagram पर एक रील देखी, जिसमें कुछ लोग धार्मिक नारे लगाते हुए एक विदेशी देश के समर्थन में बोल रहे थे।
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इसी आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया। यह धारा विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने से संबंधित है।
आरोपी 8 मार्च 2026 से हिरासत में थे और यह उनकी पहली जमानत याचिका थी।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे ने केस डायरी और उपलब्ध सामग्री का अवलोकन किया।
अदालत ने पाया कि FIR केवल Instagram रील पर आधारित थी और उसमें कही गई बातें सीधे तौर पर विभिन्न समुदायों के बीच नफरत या वैमनस्य फैलाने वाली नहीं थीं।
अदालत ने स्पष्ट कहा,
“रिकॉर्ड में उपलब्ध सामग्री से यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपियों ने विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा दिया है।”
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि रील में व्यक्त बातें एक विदेशी देश के समर्थन में विरोध (protest) के रूप में अधिक प्रतीत होती हैं, न कि समाज में तनाव पैदा करने वाली।
इसके साथ ही अदालत ने यह भी संकेत दिया कि पुलिस द्वारा FIR दर्ज करते समय पर्याप्त सामग्री का अभाव दिखता है।
आरोपियों के वकीलों ने दलील दी कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और केवल एक विचारधारा के आधार पर उन्हें फंसाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि FIR में वर्णित तथ्यों से कोई अपराध बनता ही नहीं है।
वहीं, राज्य की ओर से पेश वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला जांच के अधीन है और अन्य साक्ष्य भी सामने आ सकते हैं।
सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने बिना मामले के गुण-दोष पर अंतिम टिप्पणी किए जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
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अदालत ने आदेश दिया कि वसीम खान और यूसुफ मेहफूज को ₹50,000 के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानती पर रिहा किया जाए। साथ ही उन्हें ट्रायल कोर्ट में तय तारीखों पर उपस्थित रहने और BNSS की धारा 480(3) का पालन करने का निर्देश दिया गया।
Case Details:
Case Title: Wasim Khan and Others vs State of Madhya Pradesh
Case Number: MCRC No. 13867 of 2026
Judge: Hon’ble Shri Justice Ramkumar Choubey
Decision Date: April 9, 2026










