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808 किलो गांजा केस में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट सख्त, डिफॉल्ट बेल रद्द चार्जशीट की छोटी खामियां नहीं बन सकतीं आधार

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 808 किलो गांजा बरामदगी मामले में आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल रद्द करते हुए कहा कि चार्जशीट की मामूली खामियों के आधार पर बेल नहीं दी जा सकती।

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808 किलो गांजा केस में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट सख्त, डिफॉल्ट बेल रद्द चार्जशीट की छोटी खामियां नहीं बन सकतीं आधार

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बड़े पैमाने पर नारकोटिक्स मामले में आरोपियों को दी गई डिफॉल्ट बेल को रद्द कर दिया है।

न्यायमूर्ति डॉ. जस्टिस वेंकटा ज्योतिर्मयी प्रतापा ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट समय पर दाखिल होने के बावजूद उसमें मौजूद तकनीकी या प्रक्रियात्मक कमियों को “चार्जशीट दाखिल न होना” नहीं माना जा सकता।

यह आदेश डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) द्वारा दायर याचिका पर पारित किया गया।

मामला 5 अक्टूबर 2024 का है, जब DRI अधिकारियों ने एनएच-16 पर एक ट्रक और उसके साथ चल रही एस्कॉर्ट कार को रोका।

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जांच में ट्रक के अंदर फलों के खाली क्रेट्स के नीचे छिपाकर रखे गए 254 पैकेट गांजा बरामद हुए, जिनका कुल वजन लगभग 808.18 किलोग्राम था।

इस दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ अन्य मौके से फरार हो गए।

राज्य की ओर से दलील दी गई कि चार्जशीट निर्धारित समय सीमा के भीतर दाखिल कर दी गई थी। केवल कुछ मामूली आपत्तियां थीं, जैसे दस्तावेजों की सूची और फोटोग्राफ्स की सीडी जमा करना।

वहीं, आरोपियों की ओर से कहा गया कि चार्जशीट अधूरी थी, इसलिए उन्हें डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिलना चाहिए।

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हाई कोर्ट ने आरोपियों की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि:

  • चार्जशीट समय सीमा के भीतर दाखिल की गई थी
  • केवल तकनीकी खामियों के कारण उसे अमान्य नहीं माना जा सकता

अदालत ने यह भी कहा कि जब मामला व्यावसायिक मात्रा (commercial quantity) के मादक पदार्थों से जुड़ा हो, तो NDPS Act की धारा 37 के तहत बेल देने में सख्त मानक लागू होते हैं।

हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई बेल को कानूनी रूप से गलत ठहराते हुए उसे रद्द कर दिया।

अदालत ने आरोपियों को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करें, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मामले का शीर्षक: Senior Intelligence Officer, DRI vs Santhosh Kumar Sahoo & Ors.

केस नंबर: Criminal Petition No. 9462 of 2025

न्यायाधीश: डॉ. जस्टिस वेंकटा ज्योतिर्मयी प्रतापा

तारीख: 10 मार्च 2026

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