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पिता से मिली संपत्ति पर पति दावा नहीं कर सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा कि पिता से मिली संपत्ति पर महिला की बिना संतान मृत्यु के बाद पति का कोई अधिकार नहीं, संपत्ति पिता के वारिसों को जाएगी। - चिक्कला देविका मनसा और अन्य। बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य।

Shivam Y.
पिता से मिली संपत्ति पर पति दावा नहीं कर सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला को अपने माता-पिता से संपत्ति विरासत में मिली हो और उसकी बिना संतान मृत्यु हो जाए, तो उस संपत्ति पर पति या उसके परिवार का अधिकार नहीं बनता। यह फैसला हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(2)(a) की व्याख्या पर आधारित है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला अनाकापल्ली जिले की एक कृषि भूमि से जुड़ा था। मूल स्वामिनी चिकलला वेंकयम्मा ने वर्ष 2002 में अपनी पोती श्रीवीरिता के नाम पर गिफ्ट डीड के जरिए संपत्ति हस्तांतरित की थी। बाद में श्रीवीरिता की असामयिक मृत्यु हो गई।

इसके बाद वेंकयम्मा ने 2007 में गिफ्ट डीड को रद्द कर दिया और 2011 में दूसरी पोती देविका मनासा के नाम वसीयत (Will) कर दी। वेंकयम्मा की मृत्यु 2012 में हो गई।

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राजस्व रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन (mutation) को लेकर विवाद शुरू हुआ, जिसमें पहले राजस्व अधिकारी ने देविका मनासा के पक्ष में आदेश दिया। लेकिन जॉइंट कलेक्टर ने इस आदेश को पलटते हुए मृत महिला के पति के पक्ष में निर्णय दे दिया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(2)(a) स्पष्ट रूप से बताती है कि यदि महिला को संपत्ति अपने पिता या माता से मिली हो और उसकी कोई संतान न हो, तो वह संपत्ति पिता के वारिसों को जाएगी।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पति को ऐसी संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है और जॉइंट कलेक्टर ने कानून की गलत व्याख्या की।

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न्यायमूर्ति टारलाडा राजशेखर राव की पीठ ने कानून का विश्लेषण करते हुए कहा कि:

“धारा 15(2)(a) का स्पष्ट अर्थ है कि पिता से प्राप्त संपत्ति, संतान न होने की स्थिति में, पिता के वारिसों को ही जाएगी।”

कोर्ट ने यह भी माना कि पति या उसके परिवार को ऐसी संपत्ति पर दावा करने का अधिकार नहीं है।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि गिफ्ट डीड के रद्दीकरण को चुनौती देने का अधिकार केवल उस व्यक्ति को होता है जिसे वह संपत्ति दी गई थी, न कि उसके पति को।

कोर्ट ने कहा कि:

  • संबंधित महिला को संपत्ति उसके परिवार (पिता) से मिली थी
  • उसकी कोई संतान नहीं थी
  • ऐसे में कानून सीधे तौर पर पिता के उत्तराधिकारियों को प्राथमिकता देता है

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कोर्ट ने पूर्व न्यायिक फैसलों का भी हवाला देते हुए इस सिद्धांत को दोहराया कि ऐसी स्थिति में पति को कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता।

कोर्ट ने जॉइंट कलेक्टर का आदेश रद्द कर दिया और पहले के राजस्व अधिकारी के आदेश को बहाल कर दिया।

साथ ही तहसीलदार को निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ता देविका मनासा का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका स्वीकार की जाती है और कोई लागत (costs) नहीं लगाई जाएगी।

Case Details

Case Title: Chikkala Devika Manasa & Anr. vs State of Andhra Pradesh & Ors.

Case Number: W.P. No. 12421 of 2023

Judge: Justice Tarlada Rajasekhar Rao

Decision Date: 17 March 2026

Counsels:

  • For Petitioners: G. Venkata Subba Raju
  • For Respondents: Government Pleader for Revenue

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