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कोई तकनीकी बाधा नहीं: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने उपेक्षित सह-मालिकों के उत्तराधिकारियों को समान मुआवजा प्रदान किया

हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि सह-स्वामियों को भूमि अधिग्रहण में समान मुआवजा मिलना चाहिए, तकनीकी कारणों से भेदभाव करना न्यायसंगत नहीं है। - सोहन लाल (मृतक) अपने कानूनी वारिसों के माध्यम से बनाम हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड और अन्य

Shivam Y.
कोई तकनीकी बाधा नहीं: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने उपेक्षित सह-मालिकों के उत्तराधिकारियों को समान मुआवजा प्रदान किया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि एक ही भूमि के सह-स्वामियों के बीच मुआवजे में भेदभाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि तकनीकी आधार पर उचित मुआवजा देने से इनकार करना न्याय के खिलाफ है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला सोहन लाल (मृतक) अपने कानूनी वारिसों के माध्यम से बनाम हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड और अन्य से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने अपनी अधिग्रहित भूमि के लिए उचित बाजार मूल्य पर मुआवजे की मांग की थी।

साल 1988 में गहनवी हाइडल पावर प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहित की गई थी। 1991 में भूमि अधिग्रहण कलेक्टर (LAC) ने मुआवजा तय किया, जिसमें सह-स्वामियों बाहु राम और काली राम को लगभग समान राशि दी गई।

हालांकि, बाद में बाहु राम ने अदालत में चुनौती दी और 2003 में जिला न्यायालय ने मुआवजा बढ़ाकर करीब ₹88,000 प्रति बीघा कर दिया। लेकिन 2008 में हाईकोर्ट ने इसे घटाकर ₹48,400 प्रति बीघा कर दिया।

दूसरी ओर, काली राम या उनके उत्तराधिकारियों ने समय पर कोई कानूनी चुनौती नहीं दी, जिसके चलते उन्हें बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं मिला।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि:

  • जब एक सह-स्वामी को बढ़ा हुआ मुआवजा मिल चुका है,
  • तो दूसरे सह-स्वामी को उससे वंचित रखना अन्यायपूर्ण है।

उनका तर्क था कि “सिर्फ तकनीकी कारणों से उचित मुआवजा नहीं रोका जा सकता।”

बिजली बोर्ड और अन्य प्रतिवादियों ने दलील दी कि:

  • याचिका में देरी हुई है (delay and laches),
  • याचिकाकर्ताओं ने समय पर Section 18 या Section 28-A के तहत उपाय नहीं अपनाया,
  • इसलिए अब उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।

डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि:

“एक ही अधिसूचना के तहत अधिग्रहित भूमि के सभी मालिकों को समान और उचित मुआवजा मिलना चाहिए।”

अदालत ने यह भी कहा:

“तकनीकी आधार पर भेदभाव करना न्यायसंगत नहीं है, खासकर तब जब भूमि अधिग्रहण जबरन होता है और मालिक स्वेच्छा से भूमि नहीं देते।”

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में “न्यायसंगत और समान मुआवजा” देना सरकार की जिम्मेदारी है।

अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता भी उसी मुआवजे के हकदार हैं जो उनके सह-स्वामी को मिला था।

कोर्ट ने कहा कि:

“उचित मुआवजा केवल तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता।”

इसी के साथ, हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को भी वही मुआवजा दिया जाए जो अन्य सह-स्वामी को मिला था, और यह प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।

Case Details

Case Title: Sohan Lal (Deceased) through LRs vs HP Electricity Board and Others

Case Number: CWP No. 8104 of 2010

Judges: Chief Justice G.S. Sandhawalia, Justice Bipin Chander Negi

Decision Date: 18 March 2026

Counsels:

  • Petitioners: Mr. Vinay Kuthiala, Sr. Advocate with Mr. Diwan Singh Negi
  • Respondents: Ms. Sunita Sharma, Sr. Advocate with Mr. Mohit Sankhyan; Mr. Balram Sharma, Deputy Solicitor General of India

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