इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि किसी आरोपी को अपने बचाव में साक्ष्य पेश करने का पूरा अधिकार है और ट्रायल कोर्ट केवल सीमित परिस्थितियों में ही ऐसे गवाहों को बुलाने से मना कर सकती है। अदालत ने सेशन जज, रामपुर द्वारा पारित आदेश को रद्द करते हुए आरोपी को अपने बचाव के गवाह पेश करने की अनुमति दी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला वर्ष 2016 के एक हत्या केस से जुड़ा है, जिसमें आरोपी इंदरपाल सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 342, 506 और 34 के साथ शस्त्र अधिनियम की धारा 25 और 27 के तहत मुकदमा चल रहा है। आरोपी का दावा था कि कथित घटना के समय वह भारत में मौजूद नहीं था, बल्कि 26 जुलाई 2016 को थाईलैंड गया हुआ था। इसके समर्थन में उसने पासपोर्ट की एंट्री, इमिग्रेशन स्टांप और खरीदारी की रसीदें भी पेश कीं।
आरोपी ने ट्रायल कोर्ट में आवेदन देकर पासपोर्ट कार्यालय देहरादून और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, गृह मंत्रालय के अधिकारियों को बचाव पक्ष के गवाह के रूप में बुलाने की मांग की थी ताकि उसके विदेश में होने के दावे की पुष्टि हो सके। लेकिन ट्रायल कोर्ट ने 2 जून 2025 को यह आवेदन खारिज कर दिया।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 233 आरोपी को अपने बचाव में साक्ष्य पेश करने का स्पष्ट अधिकार देती है। अदालत ने कहा,
“यह अधिकार आरोपी का है और अदालत केवल तभी गवाह बुलाने से इंकार कर सकती है जब आवेदन का उद्देश्य मुकदमे में देरी करना, उत्पीड़न करना या न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करना हो।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट ने आवेदन खारिज करते समय इन कानूनी आधारों पर कोई ठोस कारण दर्ज नहीं किया था। आदेश में कहा गया कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार तभी सार्थक होगा जब आरोपी को अपना पक्ष साबित करने का उचित अवसर मिले।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का 2 जून 2025 का आदेश निरस्त करते हुए आरोपी की अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी 15 दिनों के भीतर नया आवेदन दाखिल करे, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाने पर निर्णय लेगा।
साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि मुकदमे में किसी भी पक्ष को अनावश्यक स्थगन नहीं दिया जाए।
Case Details
Case Title: Inderpal Singh vs State of U.P. and Another
Case Number: Application U/S 528 BNSS No. 21342 of 2025
Judge: Justice Vivek Kumar Singh
Decision Date: May 1, 2026










