मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोदरेज भूमि मामले में LARR के आदेशों को बरकरार रखा, राज्य और NHSRCL को याचिका दायर करने की अनुमति दी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोडरेज कंपनी की याचिकाएं खारिज करते हुए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को वैध माना और LARR Authority के आदेशों को बरकरार रखा। - गोदरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड बनाम कलेक्टर, मुंबई उपनगरीय जिला और अन्य।

Rajan Prajapati
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोदरेज भूमि मामले में LARR के आदेशों को बरकरार रखा, राज्य और NHSRCL को याचिका दायर करने की अनुमति दी।

बम्बई उच्च न्यायालय ने गोडरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण विवाद पर अपना फैसला सुनाया। अदालत ने कंपनी की आपत्तियों को खारिज करते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया को बरकरार रखा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उस जमीन से जुड़ा था, जिसे 15 सितंबर 2022 को भूमि अधिग्रहण अवॉर्ड के तहत अधिग्रहित किया गया था। यह अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत किया गया था।

याचिकाकर्ता कंपनी, गोदरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड, इस अधिग्रहण से असंतुष्ट थी और उसने भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण (LARR Authority) के आदेशों को चुनौती दी थी। कंपनी का कहना था कि संबंधित प्राधिकरण ने कानून का सही पालन नहीं किया।

दो याचिकाएं—Writ Petition No. 12027 of 2025 और Writ Petition No. 3467 of 2026—इसी विवाद से जुड़ी थीं।

खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति Manish Pitale और न्यायमूर्ति Shreeram V. Shirsat शामिल थे, ने मामले के सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया।

अदालत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया कानून के अनुसार की गई है और संबंधित अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर रहकर निर्णय लिया।

पीठ ने स्पष्ट किया,

“रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से यह नहीं लगता कि प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों में कोई गंभीर कानूनी त्रुटि है।”

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे पहले ही LARR Authority के सामने विचार किए जा चुके हैं और उन्हें उचित रूप से संबोधित किया गया है।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट ने जांच में खामियों पर उठाए सवाल, असम के बहु-आरोपी हत्या मामले में सभी 16 आरोपियों को किया बरी

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत नाइक ने तर्क दिया कि अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और मुआवजे के निर्धारण में भी खामियां थीं।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि अधिग्रहण पूरी तरह से वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया गया है और सभी आवश्यक कदमों का पालन किया गया।

राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की ओर से भी अधिग्रहण का समर्थन किया गया।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि LARR Authority के आदेशों में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, “हम यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि impugned आदेश किसी प्रकार की गैर-कानूनी या मनमानी कार्रवाई का परिणाम हैं।”

इस प्रकार, अदालत ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और उससे जुड़े आदेशों को वैध ठहराते हुए याचिकाओं को निरस्त कर दिया।

Case Details

Case Title: Godrej & Boyce Manufacturing Company Limited vs Collector, Mumbai Suburban District & Ors.

Case Numbers: Writ Petition No. 12027 of 2025 & Writ Petition No. 3467 of 2026

Judges: Justice Manish Pitale and Justice Shreeram V. Shirsat

Decision Date: April 24, 2026

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories