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राजस्थान हाईकोर्ट ने सड़क हादसा मुआवजा बढ़ाया, पुलिस कांस्टेबल के परिवार को ₹5.79 लाख अतिरिक्त राहत

राजस्थान हाईकोर्ट ने मृत पुलिस कांस्टेबल के परिवार को राहत देते हुए दुर्घटना मुआवजा ₹5.79 लाख बढ़ाया और कुल राशि ₹21.52 लाख तय की। - प्रियंका एवं अन्य। बनाम स्वर्ण सिंह एवं अन्य.

Rajan Prajapati
राजस्थान हाईकोर्ट ने सड़क हादसा मुआवजा बढ़ाया, पुलिस कांस्टेबल के परिवार को ₹5.79 लाख अतिरिक्त राहत

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सड़क दुर्घटना में मृत पुलिस कांस्टेबल के परिवार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने माना कि मुआवजा तय करते समय वेतन में मिलने वाले भत्तों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने पहले दिए गए मुआवजे में ₹5.79 लाख की बढ़ोतरी की।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 19 अप्रैल 2006 की एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार, राजाराम मीणा टैक्सी से जा रहे थे, तभी निवाई बाईपास के पास एक ट्रक से टक्कर हो गई। दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

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परिवार ने दावा किया कि मृतक राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल थे और लगभग ₹8,900 मासिक वेतन प्राप्त करते थे। इसके बाद परिवार ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवजा याचिका दायर की।

न्यायाधिकरण ने पहले ₹15,73,100 का मुआवजा दिया था। परिवार ने इसे अपर्याप्त बताते हुए हाईकोर्ट में अपील की।

मुख्य विवाद यह था कि क्या मृतक के वेतन में शामिल कुछ भत्ते-जैसे हाउस रेंट अलाउंस (HRA), सिटी कम्पन्सेटरी अलाउंस (CCA), वाशिंग अलाउंस और अन्य भत्ते-मुआवजा गणना में जोड़े जाने चाहिए या नहीं।

परिवार की ओर से कहा गया कि ये रकम नियमित आय का हिस्सा थीं और इन्हें हटाना गलत था।

जस्टिस संदीप तनेजा ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि “न्यायोचित मुआवजा” तय करते समय केवल बेसिक पे नहीं, बल्कि परिवार को लाभ पहुंचाने वाले भत्तों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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अदालत ने कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा इन भत्तों को वेतन से अलग करना उचित नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृतक की मासिक आय ₹8,900 मानी जाएगी।

हाईकोर्ट ने मृतक की उम्र 34 वर्ष मानते हुए 16 का गुणक (multiplier) लागू किया। भविष्य की आय वृद्धि (future prospects), आश्रितों की संख्या और अन्य मदों को जोड़ते हुए कुल मुआवजा ₹21,52,400 तय किया गया।

पहले से दिए गए ₹15,73,100 घटाने के बाद अतिरिक्त ₹5,79,300 परिवार को देने का आदेश पारित किया गया।

कोर्ट ने बीमा पक्ष को निर्देश दिया कि बढ़ी हुई राशि दो महीने के भीतर जमा की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि अतिरिक्त राशि पर वही ब्याज दर लागू होगी जो ट्रिब्यूनल ने पहले तय की थी। अपील इसी आधार पर निस्तारित कर दी गई।

Case Details

Case Title: Priyanka & Ors. vs Swarn Singh & Anr.

Case Number: S.B. Civil Miscellaneous Appeal No. 6406/2011

Judge: Justice Sandeep Taneja

Decision Date: 16 April 2026

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