तेलंगाना हाई कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति-पत्नी के बीच हुए विवाह को समाप्त कर दिया। पत्नी ने आरोप लगाया था कि विवाह से पहले पति ने अपनी वास्तविक उम्र छिपाकर गलत जन्मतिथि बताई थी, जिसके आधार पर कुंडली मिलान कराया गया और विवाह संपन्न हुआ।
न्यायालय ने मामले की परिस्थितियों और दोनों पक्षों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर तलाक की डिक्री पारित की।
Background of the Case
मामला एक अरेंज्ड मैरिज से जुड़ा था। पत्नी और पति की मुलाकात एक ऑनलाइन वैवाहिक पोर्टल के माध्यम से हुई थी। पत्नी का कहना था कि पति ने अपनी जन्मतिथि 9 फरवरी 1981 बताई थी, जबकि वास्तविक जन्मतिथि 9 फरवरी 1974 थी।
पत्नी के अनुसार, वह एक पारंपरिक परिवार से आती हैं और विवाह से पहले कुंडली मिलान को महत्व देती हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि पति द्वारा दी गई गलत जन्मतिथि के आधार पर कुंडली तैयार की गई और उसी विश्वास में विवाह हुआ।
24 अगस्त 2018 को विवाह संपन्न हुआ। बाद में विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान पत्नी को पति की वास्तविक जन्मतिथि का पता चला। इसके बाद उन्होंने इसे धोखाधड़ी बताते हुए विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की।
फैमिली कोर्ट ने वर्ष 2024 में उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ पत्नी ने हाई कोर्ट में अपील दायर की।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति के. लक्ष्मण और न्यायमूर्ति बी.आर. मधुसूदन राव की खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों और दोनों पक्षों के बयानों का परीक्षण किया।
अदालत ने कहा कि पत्नी का मुख्य आरोप यह था कि पति ने गलत जन्मतिथि बताई, जिसके कारण गलत कुंडली तैयार हुई। अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 12(1)(c) का उल्लेख करते हुए मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार किया।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने न्यायालय को बताया कि पति और पत्नी अब साथ रहने के इच्छुक नहीं हैं। दोनों ने अदालत में हलफनामे भी दाखिल किए थे, जिनमें वैवाहिक संबंध आगे जारी रखने में अनिच्छा व्यक्त की गई थी।
पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि दोनों के बीच पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं बची है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि पत्नी ने स्थायी भरण-पोषण और आभूषणों की वापसी का मुद्दा उठाया था, जबकि पति ने घरेलू हिंसा और आपराधिक मामलों को वापस लेने की बात कही थी। न्यायालय ने कहा कि ये तथ्यात्मक विवाद हैं जिनका निर्णय इस अपील में नहीं किया जा सकता।
स्थायी भरण-पोषण के संबंध में अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत अलग आवेदन आवश्यक होता है और वर्तमान मामले में ऐसा कोई आवेदन दाखिल नहीं किया गया था।
अंततः हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट, रंगारेड्डी द्वारा 3 मई 2024 को पारित आदेश को रद्द कर दिया।
खंडपीठ ने अपील स्वीकार करते हुए 24 अगस्त 2018 को संपन्न विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया और पति-पत्नी के बीच तलाक की डिक्री पारित की। साथ ही अदालत ने पत्नी को आभूषणों की वापसी तथा स्थायी भरण-पोषण से संबंधित अपने अधिकारों के लिए उचित मंच पर कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता भी प्रदान की।
Case Details:
Tase Title: Xxxxxxx v. Yyyyyyy
Case Number: F.C.A. No. 226 of 2024
Judges: K. Lakshman and B.R. Madhusudhan Rao
Decision Date: 04 May 2026

