दिल्ली हाईकोर्ट ने रोहित सेहरावत के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया (prima facie) ऐसे सवाल उठाती है जिन पर विस्तार से विचार किया जाना आवश्यक है। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला रोहित सेहरावत द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दिल्ली के पहाड़गंज थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 489/2025 से संबंधित सत्र न्यायालय की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी। उस मामले में ट्रायल कोर्ट आरोप तय करने (चार्ज फ्रेम) की दलीलें सुन रही थी।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने दलील दी कि शिकायत दुर्भावना (मालाफाइड) से प्रेरित है। उन्होंने अदालत के समक्ष एक चार्ट प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया कि शिकायतकर्ता ने वर्ष 2024 से 2025 के बीच अलग-अलग व्यक्तियों के खिलाफ इसी तरह के चार मामले दर्ज कराए थे। इनमें से दो मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हुई, जबकि एक मामले का निपटारा समझौते के जरिए हुआ।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने नवंबर 2023 में एक बयान दिया था, जिसमें उसने दोनों के रिश्ते के समाप्त होने और भविष्य में कोई शिकायत न करने की बात कही थी। इसके बावजूद अगस्त 2025 में वर्तमान एफआईआर दर्ज कराई गई।
अदालत की टिप्पणी
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने स्पष्ट किया कि इस चरण पर अदालत मामले के गुण-दोष (merits) पर अंतिम राय नहीं दे रही है, बल्कि केवल यह देख रही है कि अंतरिम राहत दिए जाने का आधार बनता है या नहीं।
अदालत ने उस दलील पर भी ध्यान दिया कि शिकायतकर्ता ने एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भी लगभग इसी अवधि के लिए शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था।
इसी संदर्भ में अदालत ने कहा,
“प्रथम दृष्टया, जब इसी प्रकार के आरोप एक ही अवधि से संबंधित दो अलग-अलग व्यक्तियों के खिलाफ लगाए जाते हैं, तो यह संदेह उत्पन्न होता है कि क्या शिकायतकर्ता वास्तव में दो अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा किए गए विवाह के वादे के आधार पर एक साथ कार्य कर रही थी।”हाईकोर्ट ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि केवल इसलिए कि किसी रिश्ते की शुरुआत विवाह के वादे के साथ हुई और बाद में वह संबंध टूट गया, इसे स्वतः दुष्कर्म का मामला नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में यह देखना आवश्यक होता है कि क्या शुरू से ही विवाह का वादा झूठा था और क्या उसी झूठे वादे के कारण सहमति प्राप्त की गई थी।
अदालत का फैसला
सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल सत्र न्यायालय में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह रोक मुख्य याचिका के अंतिम निर्णय तक अंतरिम व्यवस्था के रूप में रहेगी।
मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी, जब मुख्य याचिका और अंतरिम आवेदन पर एक साथ विचार किया जाएगा।
Case Details
Case Title: Rohit Sehrawat v. State of NCT of Delhi and Another
Case Number: CRL.M.C. 1977/2026
Judge: Justice Prateek Jalan
Decision Date: 13 July 2026

