पटना हाईकोर्ट में एक अहम बैंकिंग विवाद पर सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। मामले में सवाल था कि क्या कई वर्षों बाद अपील को फिर से बहाल किया जा सकता है। अदालत ने इस पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए ट्रिब्यूनल के अधिकारों को मान्यता दी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला M/s Tirupati Storage and Allied Pvt. Ltd. एवं अन्य बनाम UCO बैंक और अन्य से जुड़ा है। अपीलकर्ताओं ने सिंगल जज के 4 सितंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी थी।
सिंगल जज ने Debt Recovery Appellate Tribunal (DRAT), इलाहाबाद के 29 सितंबर 2023 के आदेश को रद्द कर दिया था। उस आदेश में DRAT ने करीब 8 साल बाद एक अपील को बहाल (restore) किया था।
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बैंक का तर्क था कि 2015 में अपील पहले ही खारिज हो चुकी थी क्योंकि आवश्यक प्री-डिपॉजिट नहीं किया गया था। इसलिए इतने लंबे समय बाद उसे बहाल करना कानून के खिलाफ है।
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि DRAT को अपने आदेश को वापस लेने (recall) का अधिकार है, खासकर तब जब न्यायिक त्रुटि हो या मामला तकनीकी कारणों से खारिज हुआ हो।
दूसरी ओर, बैंक की ओर से दलील दी गई कि आदेश अंतिम हो चुका था और उसे फिर से खोलना उचित नहीं है।
डिवीजन बेंच ने मामले पर विस्तार से विचार किया। अदालत ने कहा कि ट्रिब्यूनल के पास अपने आदेशों की समीक्षा और पुनर्विचार का अधिकार होता है।
अदालत ने स्पष्ट कहा,
“न्यायिक प्रक्रिया को केवल तकनीकी आधार पर रोका नहीं जा सकता। कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है।”
बेंच ने यह भी जोड़ा कि यदि किसी आदेश को वापस लेने की शक्ति कानून में दी गई है, तो उसका इस्तेमाल न्याय के हित में किया जा सकता है।
अदालत ने सिंगल जज के 4 सितंबर 2024 के आदेश को रद्द कर दिया।
इसके साथ ही, DRAT, इलाहाबाद के 29 सितंबर 2023 के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें अपील को पुनः बहाल किया गया था।
अंततः, अदालत ने कहा कि यह इंट्रा-कोर्ट अपील स्वीकार की जाती है और सभी लंबित आवेदन भी समाप्त माने जाएंगे।
Case Details
Case Title: M/s Tirupati Storage and Allied Pvt. Ltd. & Ors. vs UCO Bank & Ors.
Case Number: Letters Patent Appeal No. 1093 of 2024 (arising out of CWJC No. 1388 of 2024)
Judges: Hon’ble Mr. Justice Sudhir Singh and Hon’ble Mr. Justice Sunil Dutta Mishra
Decision Date: 16 April 2026











