मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

राजस्थान उच्च न्यायालय ने संपत्ति विवाद की याचिका खारिज की, कहा-“plaint में कोई ठोस कारण नहीं बनता”

राजस्थान हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद में बड़ा फैसला देते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश पलटा और वादी की पूरी plaint को कानूनी आधार न होने पर खारिज कर दिया। - श्रीमती चंपा देवी बनाम जोगाराम एवं अन्य।

Rajan Prajapati
राजस्थान उच्च न्यायालय ने संपत्ति विवाद की याचिका खारिज की, कहा-“plaint में कोई ठोस कारण नहीं बनता”

जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट में एक अहम सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रेखा बोराना की एकल पीठ ने संपत्ति विवाद से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए सीधे तौर पर वादी की पूरी वाद-पत्र (plaint) को ही खारिज कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला S.B. Civil Revision Petition No. 45/2026 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता चंपा देवी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी ओर से दायर आवेदन (Order 7 Rule 11 CPC) को खारिज कर दिया गया था।

वादी जोगाराम ने दावा किया था कि वह कृषि भूमि का मालिक है और 2012 में चंपा देवी व अन्य के साथ विकास (development) के लिए एक समझौता किया था। आरोप था कि बाद में बिना अनुमति और भुगतान के, पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन की बिक्री कर दी गई।

वादी ने इस बिक्री को फर्जी बताते हुए उसे रद्द करने और स्थायी निषेधाज्ञा (permanent injunction) की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले Dahiben vs. Arvindbhai Kalyanji Bhanusali का हवाला दिया।

Read also:- UP टेंडर विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने HDPE बैग टेंडर प्रक्रिया पर लगाई रोक, याचिकाकर्ता की अयोग्यता पर उठाए सवाल

पीठ ने स्पष्ट कहा,

“यदि वादी के आरोप मान भी लिए जाएं कि पूरी राशि का भुगतान नहीं हुआ, तब भी यह बिक्री विलेख (sale deed) को रद्द करने का आधार नहीं बनता।”

अदालत ने यह भी जोड़ा कि,

“ऐसे मामलों में वादी के पास अन्य कानूनी उपाय हो सकते हैं, जैसे बकाया राशि की वसूली, लेकिन सीधे बिक्री रद्द नहीं की जा सकती।”

न्यायालय ने पाया कि वादी की याचिका में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे बिक्री विलेख को अवैध ठहराया जा सके।
Order 7 Rule 11 CPC के तहत, यदि वाद में prima facie कोई कारण (cause of action) नहीं बनता, तो उसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जा सकता है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा:
“विस्तृत विश्लेषण के बाद यह न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की जाती है।”

इसके साथ ही—

  • ट्रायल कोर्ट का 29.09.2025 का आदेश रद्द कर दिया गया
  • वादी की पूरी plaint खारिज कर दी गई

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि वादी कोर्ट फीस की वापसी के लिए आवेदन करता है, तो ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करेगा।

Case Details

Case Title: Smt. Champa Devi vs. Jogaram & Anr.

Case Number: S.B. Civil Revision Petition No. 45/2026

Judge: Hon’ble Ms. Justice Rekha Borana

Decision Date: 09 April 2026

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories