लखनऊ बेंच में सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के एक टेंडर विवाद में अहम हस्तक्षेप किया। अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि याचिकाकर्ता कंपनी को तकनीकी आधार पर अयोग्य ठहराने का फैसला मनमाना प्रतीत होता है।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला M/S Associated Jute Industries द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है, जिसमें HDPE (हाई डेंसिटी पॉली एथिलीन) बैग की सप्लाई के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि कंपनी ने सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे खरीद आदेश और नेशनल सीड कॉरपोरेशन लिमिटेड (NSCL) का प्रमाणपत्र, जमा किया था। इन दस्तावेजों से यह साबित होता है कि कंपनी ने पहले भी समान तकनीकी मानकों वाले HDPE बैग की सप्लाई सफलतापूर्वक की है।
इसके बावजूद 15 अप्रैल 2026 को कंपनी की बोली को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि आवश्यक दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए।
याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि “पूरी प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई थी,” क्योंकि 16 अप्रैल को दी गई आपत्ति के बावजूद 18 अप्रैल को फिर से वही कारण बताकर अयोग्यता बरकरार रखी गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया “जल्दबाजी में और एक विशेष पक्ष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से” संचालित की गई।
वहीं, राज्य और निगम की ओर से पेश अधिवक्ता ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने HDPE बैग के बजाय PP (पॉलीप्रोपाइलीन) बैग से जुड़े दस्तावेज अपलोड किए थे, जिससे उनकी पात्रता नहीं बनती।
दो सदस्यीय पीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि दस्तावेजों से prima facie यह स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता ने वास्तव में HDPE बैग की सप्लाई की थी।
अदालत ने टिप्पणी की, “याचिकाकर्ता की बोली को इस आधार पर खारिज करना कि आवश्यक प्रमाण नहीं दिए गए, कानून और तथ्यों दोनों के आधार पर उचित नहीं है।”
पीठ ने यह भी कहा कि टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों को कुछ हद तक विवेकाधिकार जरूर होता है, लेकिन यह असीमित नहीं है और न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है।
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एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी में अदालत ने कहा, “निर्णय प्रक्रिया पहली नजर में पक्षपात और अनुचितता से प्रभावित प्रतीत होती है।”
कोर्ट ने इस मामले को समान अवसर और निष्पक्षता के सिद्धांत से जोड़ते हुए कहा कि सरकारी ठेकों में “समान स्तर का अवसर” देना जरूरी है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(g) के तहत संरक्षित है।
अदालत ने फिलहाल पूरे टेंडर प्रोसेस पर रोक लगा दी है। साथ ही निर्देश दिया कि यदि वित्तीय बोली में किसी पक्ष का चयन हो चुका है, तो भी अगली सुनवाई तक कोई अनुबंध न किया जाए।
पीठ ने स्पष्ट किया कि L-1 घोषित होने मात्र से किसी पक्ष को अनुबंध का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं हो जाता।
Case Details
Case Title: M/s Associated Jute Industries vs State of U.P. & Others
Case Number: WRIT - C No. - 4148 of 2026
Judge: Justice Shekhar B. Saraf and Justice Abdhesh Kumar Chaudhary
Decision Date: April 22, 2026











