नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि “नेबरहुड स्कूल” की जिम्मेदारी है कि राज्य सरकार द्वारा भेजे गए बच्चों को बिना देरी के प्रवेश दें। अदालत ने लखनऊ पब्लिक स्कूल से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला एक छात्रा के दाखिले से जुड़ा है, जिसने वर्ष 2024-25 के लिए उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के माध्यम से प्री-प्राइमरी कक्षा में आवेदन किया था।
सरकारी प्रक्रिया के तहत छात्रा का चयन हुआ और उसका नाम सूची में शामिल कर संबंधित स्कूल-लखनऊ पब्लिक स्कूल-को भेजा गया।
हालांकि, जब छात्रा स्कूल पहुंची तो उसे दाखिला नहीं दिया गया। स्कूल ने यह कहते हुए प्रवेश रोका कि उसकी पात्रता को लेकर “अनिश्चितता” है।
इसके बाद छात्रा ने न्यायिक राहत के लिए कदम उठाया और मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां से उसके पक्ष में आदेश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़े शब्दों में कहा कि ऐसे मामलों में देरी या इनकार कानून और संविधान दोनों के खिलाफ है।
अदालत ने कहा,
“नेबरहुड स्कूल की यह संवैधानिक और वैधानिक जिम्मेदारी है कि राज्य द्वारा भेजे गए बच्चों को बिना किसी देरी के प्रवेश दिया जाए।”
बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि यह दायित्व अनुच्छेद 21A और Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 के तहत निर्धारित है।
अदालत ने यह भी माना कि उत्तर प्रदेश के नियम (UP RTE Rules, 2011) के अनुसार चयनित छात्रों को प्रवेश देने में किसी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए स्कूल को निर्देश दिया कि छात्रा को बिना किसी देरी के प्रवेश दिया जाए।
अदालत ने साफ किया कि इस तरह के मामलों में स्कूलों को कानून का पालन करना ही होगा और चयनित बच्चों को रोका नहीं जा सकता।
Case Details
Case Title: Lucknow Public School, Eldico & Anr. v. State of Uttar Pradesh & Ors.
Case Number: SLP (C) Diary No. 60657 of 2024
Judge: Justice Pamidighantam Sri Narasimha and Justice Alok Aradhe
Decision Date: April 28, 2026











