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पश्चिम बंगाल चुनाव: प्रोफेसरों को प्रिसाइडिंग ऑफिसर बनाने का आदेश हाईकोर्ट ने रद्द किया

हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रोफेसरों को प्रिसाइडिंग ऑफिसर बनाने का आदेश रद्द करते हुए कहा कि बिना उचित कारण ऐसा निर्णय अवैध है। - रूपा बनर्जी नी समजपति बनाम भारतीय चुनाव आयोग और अन्य।

Shivam Y.
पश्चिम बंगाल चुनाव: प्रोफेसरों को प्रिसाइडिंग ऑफिसर बनाने का आदेश हाईकोर्ट ने रद्द किया

कोलकाता से एक अहम आदेश में हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रिसाइडिंग ऑफिसर नियुक्त करने के फैसले को गैर-कानूनी ठहराते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना उचित कारण दर्ज किए ऐसा निर्णय नहीं लिया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता, जो राज्य के विभिन्न सरकारी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, ने अपनी नियुक्ति को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि उनकी रैंक और वेतनमान को नजरअंदाज कर उन्हें प्रिसाइडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी दी गई।

उन्होंने 16/17 फरवरी 2010 के उस सर्कुलर का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि ग्रुप A स्तर के अधिकारियों और शिक्षकों को बिना विशेष कारण के पोलिंग ड्यूटी में नहीं लगाया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से दलील दी गई कि 7 जून 2023 के सर्कुलर के अनुसार अधिकारियों की तैनाती में उनके पद, वेतन और स्थिति को ध्यान में रखा जाता है। साथ ही यह भी कहा गया कि चुनाव के लिए लगभग 90,000 बूथ होने के कारण कुछ प्रशासनिक कठिनाइयाँ हो सकती हैं।

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दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कम पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को उच्च जिम्मेदारी दी गई, जबकि उन्हें अनुचित तरीके से पोलिंग ड्यूटी में लगाया गया।

अदालत ने पाया कि चुनाव अधिकारियों ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया कि “अपरिहार्य परिस्थितियों” में ही यह नियुक्ति की गई थी।

पीठ ने स्पष्ट कहा,

“रिकॉर्ड से यह नहीं दिखता कि ऐसे कोई कारण मौजूद थे, जिनके आधार पर शिक्षकों को प्रिसाइडिंग ऑफिसर बनाया गया।”

अदालत ने यह भी माना कि 2010 का सर्कुलर अब भी लागू है, क्योंकि 2023 के सर्कुलर में उसे निरस्त करने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया।

साथ ही, यह स्पष्ट किया गया कि जिन सदस्यों ने पहले ही प्रशिक्षण ले लिया है और स्वेच्छा से कार्य करना चाहते हैं, उनके लिए यह आदेश बाधक नहीं होगा।

अदालत ने चुनाव आयोग को यह भी स्वतंत्रता दी कि वह याचिकाकर्ताओं को उनकी रैंक और वेतन के अनुरूप अन्य चुनावी जिम्मेदारियाँ सौंप सकता है।

अंततः, संबंधित आवेदन (CAN 1 of 2026) को भी खारिज करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया गया।

Case Details:

Case Title: Rupa Banerjee Nee Samjpati vs Election Commission of India & Ors.

Case Number: WPA 9020 of 2026 (with CAN 1 of 2026)

Judge: Justice Krishna Rao

Decision Date: April 17, 2026

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