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बिक्री विलेख को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता, सब-रजिस्ट्रार को पंजीकरण या अस्वीकृति पर निर्णय लेना होगा: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने कहा कि सब-रजिस्ट्रार, ऊंचे अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने के नाम पर सेल डीड के रजिस्ट्रेशन को अनिश्चित काल तक पेंडिंग नहीं रख सकता; उसे या तो इसे रजिस्टर करना होगा या फिर इसे करने से मना करना होगा। - अंग्रेज़ सिंह बनाम इंस्पेक्टर जनरल रजिस्ट्रेशन, जम्मू और अन्य।

CB News Desk
बिक्री विलेख को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता, सब-रजिस्ट्रार को पंजीकरण या अस्वीकृति पर निर्णय लेना होगा: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सब-रजिस्ट्रार किसी बिक्री विलेख (Sale Deed) के पंजीकरण को केवल इसलिए लंबित नहीं रख सकता क्योंकि उसने उच्च अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने कहा कि पंजीकरण प्राधिकारी के सामने केवल दो विकल्प होते हैं-दस्तावेज़ का पंजीकरण करना या कानून के अनुसार उसे अस्वीकार करना।

न्यायमूर्ति राहुल भारती ने यह आदेश अंगरेज सिंह और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता अंगरेज सिंह ने वर्ष 2018 में अशोक कुमार के पक्ष में एक पंजीकृत सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी (General Power of Attorney) निष्पादित की थी। इसी अधिकार के आधार पर अशोक कुमार ने 25 नवंबर 2025 को अंगरेज सिंह की ओर से अपने पुत्र, जो मामले में दूसरे याचिकाकर्ता हैं, के पक्ष में भूमि का बिक्री विलेख निष्पादित किया।

बिक्री विलेख को पंजीकरण के लिए सब-रजिस्ट्रार, हीरानगर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके साथ आवश्यक राजस्व अभिलेख और फर्द इंतिखाब भी संलग्न था, जिसमें संबंधित अधिकारियों ने प्रमाणित किया था कि प्रस्तावित लेन-देन किसी भी लागू भूमि कानून या सरकारी आदेश का उल्लंघन नहीं करता।

हालांकि, सब-रजिस्ट्रार ने 27 नवंबर 2025 को एक पत्र जारी कर बताया कि संबंधित भूमि सरकारी आदेश REV (LB) 202 of 2007 के अंतर्गत प्राप्त हुई थी और उसके हस्तांतरण को लेकर पंजीकरण महानिरीक्षक कार्यालय से स्पष्टीकरण मांगा गया है। याचिकाकर्ताओं को आगे के निर्देश मिलने तक प्रतीक्षा करने को कहा गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि पंजीकरण अधिनियम, 1908 में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो किसी सब-रजिस्ट्रार को दस्तावेज़ के पंजीकरण पर निर्णय टालने और उसे अनिश्चित स्थिति में रखने की अनुमति देती हो।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय सत्यपाल आनंद बनाम मध्य प्रदेश राज्य का हवाला देते हुए कहा कि पंजीकरण अधिकारी की भूमिका मुख्यतः प्रशासनिक है। वह केवल यह देखता है कि दस्तावेज़ आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के अनुरूप है या नहीं। उसे स्वामित्व या लेन-देन की वैधता पर विस्तृत निर्णय देने का अधिकार नहीं है।

पीठ ने कहा, “पंजीकरण अधिनियम की पूरी व्यवस्था किसी पंजीकरण प्राधिकारी को यह छूट नहीं देती कि वह किसी दस्तावेज़ के पंजीकरण पर निर्णय को अनिश्चितकाल तक स्थगित रखे और उच्च अधिकारियों से निर्देश प्राप्त होने की प्रतीक्षा करे।”

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि राजस्व अधिकारियों ने पहले ही प्रमाणित कर दिया था कि प्रस्तावित बिक्री किसी कानून का उल्लंघन नहीं करती। इसके बावजूद सब-रजिस्ट्रार ने ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं बताया जिसके आधार पर वह पंजीकरण प्रक्रिया को रोक सके।

इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने सब-रजिस्ट्रार, हीरानगर द्वारा जारी विवादित संचार को कानून के अनुरूप नहीं माना और याचिका का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया कि वह प्रस्तुत बिक्री विलेख के संबंध में चार सप्ताह के भीतर या तो पंजीकरण करे या फिर विधि अनुसार पंजीकरण से इंकार करने का आदेश पारित करे।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आदेश की प्रति जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के पंजीकरण महानिरीक्षक को भेजी जाए ताकि इसे सभी सब-रजिस्ट्रारों और रजिस्ट्रारों के बीच अनुपालन हेतु प्रसारित किया जा सके।

Case Details:

Case Title: Angrez Singh v. Inspector General Registration, Jammu & Ors.

Case Number: WP(C) No. 3618/2025

Judge: Justice Rahul Bharti

Decision Date: 22 December 2025

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