भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली के हौज खास स्थित ए.एन. झा डियर पार्क से हिरणों के ट्रांसलोकेशन (स्थानांतरण) के मुद्दे पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने इस पूरे मामले को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन से जुड़ा बताते हुए विस्तृत निगरानी और वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका “New Delhi Nature Society” द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि डियर पार्क से सैकड़ों हिरणों को राजस्थान के टाइगर रिजर्व और अन्य स्थानों पर भेजा गया, लेकिन इस प्रक्रिया में उचित वैज्ञानिक और कानूनी मानकों का पालन नहीं किया गया।
पहले आदेश (26 नवंबर 2025) में कोर्ट ने केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) को निर्देश दिया था कि वह डियर पार्क की वास्तविक स्थिति, हिरणों की संख्या और उनकी क्षमता का आकलन करे, साथ ही ट्रांसलोकेशन के लिए उपयुक्त स्थानों का निरीक्षण करे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वन्यजीवों का ट्रांसलोकेशन केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं हो सकता, बल्कि यह एक संवेदनशील प्रक्रिया है जिसमें वैज्ञानिक अध्ययन और पशु कल्याण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बेंच ने कहा,
“हिरणों की भलाई और पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करना अनिवार्य है, और इसके लिए स्थापित दिशानिर्देशों का पालन जरूरी है।”
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि डियर पार्क की वहन क्षमता (carrying capacity), भोजन की उपलब्धता, और चिकित्सा सुविधाओं का सही आकलन किए बिना ट्रांसलोकेशन उचित नहीं माना जा सकता।
सीईसी ने 6 मार्च 2026 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें ट्रांसलोकेशन की प्रक्रिया और उससे जुड़े जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम निर्देश दिए:
- डियर पार्क और ट्रांसलोकेशन साइट्स का वैज्ञानिक मूल्यांकन अनिवार्य किया गया
- भविष्य में किसी भी ट्रांसलोकेशन के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने को कहा गया
- पर्यावरण मंत्रालय को इन दिशानिर्देशों की समीक्षा कर उन्हें छह महीने में लागू करने का निर्देश दिया गया
- डियर पार्क में किसी भी तरह के व्यावसायिक कार्यक्रम या निजी आयोजनों पर रोक लगाई गई
अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को आदेश दिया कि वह डियर पार्क की जमीन में कमी के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे।
साथ ही स्पष्ट किया गया कि डियर पार्क को एक “संरक्षित वन क्षेत्र” के रूप में बनाए रखा जाएगा और इसकी प्रकृति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
बेंच ने कहा,
“इस क्षेत्र की स्थिति किसी भी परिस्थिति में नहीं बदली जानी चाहिए और इसे संरक्षित वन के रूप में ही बनाए रखना होगा।”
इन सभी निर्देशों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया। साथ ही पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया गया कि वह निर्धारित समय सीमा में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।
मामले को अगली सुनवाई के लिए 19 जनवरी 2027 को सूचीबद्ध किया गया है, ताकि जारी निर्देशों के पालन की समीक्षा की जा सके।
Case Details
Case Title: New Delhi Nature Society v. Director Horticulture, DDA & Ors.
Case Number: Special Leave Petition (Civil) No(s). 13374–13375 of 2025
Court: Supreme Court of India
Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta
Decision Date: April 27, 2026










