नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती से जुड़े एक लंबे विवाद में अहम फैसला सुनाया। अदालत ने साफ कहा कि यदि कोई उम्मीदवार मूल पात्रता ही पूरी नहीं करता, तो उसकी नियुक्ति टिक नहीं सकती भले ही बाद में उसे बहाल किया गया हो।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अजय कुमार मलिक से जुड़ा है, जिसमें वर्ष 2005 की पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान चयनित उम्मीदवारों पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
रिकॉर्ड के अनुसार, अजय कुमार मलिक को पहले मेडिकल जांच में “नॉक-नी” (घुटनों की विकृति) के कारण अयोग्य पाया गया और 2007 में उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई। बाद में अदालत के आदेशों और अन्य उम्मीदवारों के साथ समानता का हवाला देकर उन्हें 2013 में अस्थायी रूप से पुनः नियुक्ति मिल गई।
इसके बाद राज्य ने जांच शुरू की और आरोप लगाया कि उम्मीदवार ने अपनी मेडिकल स्थिति की सही जानकारी नहीं दी। विभागीय कार्रवाई के बाद 2017 में उनकी सेवा फिर से समाप्त कर दी गई।
राज्य सरकार का तर्क था कि उम्मीदवार ने जानबूझकर अपनी मेडिकल अयोग्यता छिपाई और गलत तरीके से नौकरी हासिल की।
वहीं, प्रतिवादी की ओर से कहा गया कि उन्होंने कोई तथ्य नहीं छिपाया और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने मामले का विस्तृत विश्लेषण करते हुए कहा:
“किसी भी सरकारी पद के लिए आवेदन करते समय सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का स्पष्ट खुलासा करना आवश्यक है। मेडिकल फिटनेस जैसी मूल शर्त छिपाकर नियुक्ति प्राप्त करना स्वीकार्य नहीं है।”
अदालत ने यह भी कहा कि केवल अन्य उम्मीदवारों के साथ समानता का दावा करने से अधिकार नहीं बनता, खासकर जब स्वयं उम्मीदवार पात्रता मानकों पर खरा नहीं उतरता।
पीठ ने स्पष्ट रूप से माना कि नॉक-नी जैसी स्थिति पुलिस सेवा के लिए अयोग्यता है और यह तथ्य उम्मीदवार के ज्ञान में था, फिर भी इसका खुलासा नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि सेवा न्यायाधिकरण और हाईकोर्ट ने मामले के मूल पहलू मेडिकल अयोग्यता को नजरअंदाज कर दिया।
अदालत ने कहा कि केवल तकनीकी आधार पर राहत देना उचित नहीं था, जबकि उम्मीदवार मूल पात्रता ही पूरी नहीं करता था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट और सेवा न्यायाधिकरण के आदेशों को रद्द करते हुए राज्य सरकार की अपील स्वीकार कर ली।
अदालत ने आदेश दिया कि:
- प्रतिवादी की सेवा समाप्ति वैध मानी जाएगी और बहाल रहेगी।
- जो वेतन उन्होंने कार्यकाल के दौरान प्राप्त किया है, उसकी वसूली नहीं होगी।
- यदि कोई बकाया वेतन है, तो उसे चार सप्ताह में भुगतान किया जाएगा, अन्यथा उस पर 6% वार्षिक ब्याज लगेगा।
Case Details
Case Title: State of Uttar Pradesh & Ors. vs Ajay Kumar Malik
Case Number: Civil Appeals arising out of SLP (C) Nos. 11145–11146 of 2025
Judge: Justice Ahsanuddin Amanullah, Justice N. V. Anjaria
Decision Date: April 20, 2026










