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सुप्रीम कोर्ट: पियाजियो को नहीं मिली राहत, यूपी में 33 एकड़ इंडस्ट्रियल प्लॉट की लीज रद्द बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने पियाजियो की अपील खारिज करते हुए यूपी में 33 एकड़ औद्योगिक प्लॉट की लीज रद्द करने के फैसले को सही ठहराया। - M/s. पियाजियो व्हीकल्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट: पियाजियो को नहीं मिली राहत, यूपी में 33 एकड़ इंडस्ट्रियल प्लॉट की लीज रद्द बरकरार

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबे समय से चल रहे औद्योगिक विवाद पर अंतिम मुहर लगा दी। मामला Piaggio Vehicles Pvt. Ltd. और उत्तर प्रदेश राज्य के बीच 33 एकड़ औद्योगिक जमीन की लीज रद्द होने से जुड़ा था। अदालत ने साफ किया कि नियमों का पालन न होने पर राहत नहीं दी जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित प्लॉट को लेकर शुरू हुआ था। यह जमीन कंपनी को औद्योगिक उपयोग के लिए दी गई थी, जिसमें तय समय के भीतर निर्माण और उत्पादन शुरू करना जरूरी था।

रिकॉर्ड के अनुसार, कंपनी को 2002 में लीज दी गई थी और बाद में 2007 में नई लीज डीड भी हुई। लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद प्लॉट का अधिकांश हिस्सा खाली रहा।

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उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) ने 2008 में यह कहते हुए लीज रद्द कर दी कि कंपनी ने शर्तों का उल्लंघन किया है।

कंपनी ने इस फैसले को पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि कंपनी ने लंबे समय तक प्लॉट का सही उपयोग नहीं किया।

बेंच ने कहा,

“लीज की शर्तें स्पष्ट थीं कि जमीन का उपयोग तय समय में होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”

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अदालत ने यह भी नोट किया कि कंपनी ने कई बार समय बढ़ाने की मांग की, लेकिन कोई ठोस योजना या प्रगति नहीं दिखाई।

UPSIDA की ओर से दलील दी गई कि

“कंपनी ने वर्षों तक जमीन खाली रखी, जिससे अन्य इच्छुक उद्योगों को अवसर नहीं मिल सका।”

कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि कंपनी ने निर्माण कार्य शुरू करने में गंभीरता नहीं दिखाई और आवश्यक दस्तावेज भी समय पर जमा नहीं किए।

कंपनी ने कहा कि उसने लगभग 27 करोड़ रुपये का निवेश किया और कई जरूरी अनुमतियां भी लीं।

उसकी ओर से यह भी कहा गया कि

“हम विस्तार के कारण दूसरे प्लांट में व्यस्त थे, इसलिए देरी हुई।”

साथ ही कंपनी ने यह प्रस्ताव भी दिया कि वह अब इस जमीन पर इलेक्ट्रिक व्हीकल यूनिट शुरू करना चाहती है और बकाया राशि जमा करने को तैयार है।

लेकिन राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को पहले ही खारिज कर दिया था।

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राज्य की ओर से कहा गया कि कंपनी ने लीज की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया।

“सिर्फ 7.68% जमीन का ही उपयोग हुआ, बाकी पूरी तरह खाली रही,” यह दलील अदालत में रखी गई।

साथ ही यह भी बताया गया कि कंपनी को कई मौके दिए गए, लेकिन उसने समय पर आवश्यक शर्तें पूरी नहीं कीं।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कंपनी की अपील खारिज कर दी।

अदालत ने माना कि UPSIDA द्वारा लीज रद्द करना उचित था और इसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

इस प्रकार, 33 एकड़ औद्योगिक प्लॉट की लीज रद्द करने का फैसला बरकरार रखा गया।

Case Title: M/s. Piaggio Vehicles Pvt. Ltd. vs State of U.P. & Others

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