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भरण-पोषण कानून में स्पष्टता: केवल माता-पिता को अपील का अधिकार, ओडिशा हाईकोर्ट ने बेटे की याचिका खारिज की

ओडिशा हाईकोर्ट ने बेटे की अपील खारिज कर वृद्ध मां के पक्ष में मेंटेनेंस आदेश बहाल किया, कहा अपील का अधिकार केवल माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक को है। - पारबती दास बनाम कलेक्टर, बालासोर और अन्य।

Shivam Y.
भरण-पोषण कानून में स्पष्टता: केवल माता-पिता को अपील का अधिकार, ओडिशा हाईकोर्ट ने बेटे की याचिका खारिज की

ओडिशा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि माता-पिता के भरण-पोषण से जुड़े मामलों में अपील का अधिकार सीमित है। अदालत ने एक वृद्ध महिला के पक्ष में फैसला देते हुए बेटे द्वारा दायर अपील को अवैध ठहराया और पहले दिया गया मेंटेनेंस आदेश बहाल कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 83 वर्षीय विधवा महिला पार्बती दास से जुड़ा है, जिन्हें उनके बेटों ने पारिवारिक घर में रहने की जगह तक नहीं दी। आय का कोई साधन न होने के कारण उन्होंने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत सहायता मांगी।

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सब-कलेक्टर ने 29 फरवरी 2024 को आदेश देते हुए एक बेटे को मां की देखभाल करने और दूसरे बेटे को ₹5,000 प्रति माह देने का निर्देश दिया।

हालांकि, इस आदेश के खिलाफ एक बेटे ने कलेक्टर के समक्ष अपील दायर की, जिसके बाद मामला दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेज दिया गया।

हाईकोर्ट ने कानून की व्याख्या करते हुए साफ कहा कि धारा 16 के तहत अपील का अधिकार केवल “सीनियर सिटीजन या माता-पिता” को ही दिया गया है।

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अदालत ने कहा,

“जब कानून स्पष्ट रूप से केवल माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक को अपील का अधिकार देता है, तो अन्य व्यक्तियों को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि यह कानून एक “beneficial legislation” है, जिसका उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा देना है।

“इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है, इसलिए इसकी व्याख्या उसी दिशा में होनी चाहिए।”

मुख्य सवाल यह था कि क्या बेटा, जो न तो “सीनियर सिटीजन” है और न ही “parent”, इस कानून के तहत अपील कर सकता है?

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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा करना कानून के दायरे से बाहर है और ऐसी अपील “non-maintainable” यानी विचार योग्य नहीं है।

अदालत ने कलेक्टर द्वारा पारित आदेश को “बिना अधिकार” (without jurisdiction) करार देते हुए रद्द कर दिया।

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साथ ही, सब-कलेक्टर द्वारा दिया गया मूल आदेश जिसमें मां के रहने और भरण-पोषण की व्यवस्था तय की गई थी को बहाल कर दिया गया।

अंत में, हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि वृद्ध महिला के हितों की रक्षा के लिए दिया गया आदेश कानून के अनुरूप है और उसे बरकरार रखा जाना चाहिए।

Case Details

Case Title: Parbati Das v. Collector, Balasore & Ors.

Case Number: W.P.(C) No. 680 of 2026

Judge: Justice A.C. Behera

Decision Date: March 30, 2026

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