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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 1988 के जमीन समझौते को दी कानूनी मान्यता

सुप्रीम कोर्ट ने 1988 के जमीन सौदे में खरीदार के पक्ष में फैसला देते हुए specific performance को बरकरार रखा और विक्रेताओं द्वारा की गई बाद की बिक्री को अमान्य ठहराया। - रूसी फिशरीज प्राइवेट लिमिटेड और अन्य बनाम भावना सेठ और अन्य।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 1988 के जमीन समझौते को दी कानूनी मान्यता

भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने एक पुराने भूमि विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए खरीदार के पक्ष में विशेष प्रदर्शन (समझौते के अनुसार बिक्री पूरी करने का आदेश) को बरकरार रखा। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अपील में तथ्यात्मक निष्कर्षों को आसानी से नहीं बदला जा सकता।

Background of the Case

मामला Russi Fisheries Pvt. Ltd. बनाम भावना सेठ एवं अन्य से जुड़ा है। यह विवाद 18 जुलाई 1988 के एक एग्रीमेंट टू सेल से शुरू हुआ था, जिसमें लगभग 79 कनाल 15 मरला जमीन ₹15.41 लाख में बेचने पर सहमति बनी थी।

खरीदार ने दावा किया कि उसने कुल ₹7.75 लाख का भुगतान कर दिया था और अंतिम तारीख 30 जून 1989 को रजिस्ट्री कराने के लिए तैयार था। लेकिन विक्रेता पक्ष उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा।

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ट्रायल कोर्ट ने विशेष प्रदर्शन से इनकार करते हुए केवल ₹2.75 लाख (चेक द्वारा भुगतान) की वापसी का आदेश दिया। हालांकि, फर्स्ट अपील में इस निर्णय को पलट दिया गया और खरीदार के पक्ष में specific performance का आदेश पारित हुआ, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति Pankaj Mithal शामिल थे, ने कहा कि:

“फर्स्ट अपीलेट कोर्ट द्वारा दिए गए तथ्यात्मक निष्कर्षों में कोई स्पष्ट त्रुटि या अवैधता नहीं पाई गई, इसलिए उन्हें बदलने का कोई आधार नहीं है।”

कोर्ट ने यह भी माना कि खरीदार ने समय बढ़ाने, भुगतान करने और रजिस्ट्री के लिए तैयार रहने के पर्याप्त सबूत पेश किए हैं।

“सिर्फ इसलिए कि वादी स्वयं गवाही के लिए उपस्थित नहीं हुआ, उसके दावे को खारिज नहीं किया जा सकता, यदि अन्य साक्ष्य पर्याप्त हैं,” कोर्ट ने कहा।

साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमे के दौरान की गई जमीन की बिक्री lis pendens (विवाद के दौरान संपत्ति हस्तांतरण) के सिद्धांत के तहत अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।

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मुख्य सवाल यह था कि क्या इतने लंबे समय (करीब 15 साल) के बाद भी specific performance का आदेश उचित है, और क्या खरीदार ने अपने दायित्व निभाने की तत्परता (readiness and willingness) साबित की है।

कोर्ट ने पाया कि:

  • समय बढ़ाने के दस्तावेज वैध थे
  • नकद भुगतान के साक्ष्य मौजूद थे
  • खरीदार ने अंतिम दिन रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होकर अपनी तत्परता साबित की

सुप्रीम कोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए कहा कि:

“इस मामले में अपील में कोई मेरिट नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।”

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कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि:

  • विक्रेताओं द्वारा 2009 और 2025 में किए गए जमीन के ट्रांसफर अमान्य (non est) हैं
  • फर्स्ट अपीलेट कोर्ट द्वारा दिया गया specific performance का आदेश बरकरार रहेगा

Case details

Case Title: Russi Fisheries Pvt. Ltd. & Anr. vs Bhavna Seth & Ors.

Case Number: Civil Appeal No. 109 of 2010

Judges: Justice Pankaj Mithal and Justice Prasanna B. Varale

Decision Date: April 9, 2026

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