सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में जूनियर इंजीनियर भर्ती से जुड़े एक अहम विवाद पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अनारक्षित (Unreserved) श्रेणी में क्षैतिज (horizontal) आरक्षण वाले पदों पर चयन केवल मेरिट के आधार पर होगा। अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के आदेश को पलट दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला West Bengal State Electricity Transmission Company Ltd. द्वारा जारी भर्ती अधिसूचना से जुड़ा था। जूनियर इंजीनियर (सिविल) ग्रेड-II के 30 पदों में से एक पद UR (PWD-LV) यानी अनारक्षित श्रेणी में कम दृष्टि (Low Vision) वाले दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित था।
विवाद तब शुरू हुआ जब एक OBC-A श्रेणी के उम्मीदवार, जो PWD-LV भी थे और अधिक अंक लाए थे, को इस पद के लिए चयनित कर लिया गया। जबकि एक अनारक्षित PWD-LV उम्मीदवार, जिनके अंक कम थे, ने इस चयन को चुनौती दी।
Read Also:- सबूतों की कड़ी टूटी: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में दोषी ठहराए आरोपी को किया बरी
सिंगल बेंच ने अधिक अंक लाने वाले OBC-A उम्मीदवार के पक्ष में फैसला दिया।
हालांकि, डिवीजन बेंच ने इसे पलटते हुए कहा कि यदि अनारक्षित श्रेणी का PWD-LV उम्मीदवार उपलब्ध है, तो उसी को नियुक्त किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस व्याख्या को गलत ठहराया। अदालत ने कहा कि “अनारक्षित श्रेणी कोई अलग सामाजिक श्रेणी नहीं है, बल्कि यह सभी के लिए खुला क्षेत्र है।”
अदालत ने स्पष्ट किया:
“जब कोई पद अनारक्षित श्रेणी में PWD-LV के लिए आरक्षित होता है, तो उस पर सभी सामाजिक वर्गों के PWD-LV उम्मीदवार समान रूप से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”
बेंच ने आगे कहा,
“ऐसी स्थिति में चयन का एकमात्र आधार मेरिट होगा। कम अंक वाले उम्मीदवार को सिर्फ इसलिए प्राथमिकता नहीं दी जा सकती कि वह अनारक्षित श्रेणी से है।”
अदालत ने “vertical” (सामाजिक) और “horizontal” (विशेष श्रेणी) आरक्षण के सिद्धांत को समझाते हुए कहा कि क्षैतिज आरक्षण सभी सामाजिक वर्गों में लागू होता है।
Read Also:- सुप्रीम कोर्ट ने पड़ोसी विवाद केस में दी बड़ी राहत: CCTV सबूत के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द
निर्णय में कहा गया कि:
“आरक्षण व्यवस्था में ‘migration’ यानी बेहतर मेरिट वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार का अनारक्षित पद पर चयन पूरी तरह वैध है।”
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि OBC-A श्रेणी का उम्मीदवार, जो PWD-LV भी था, अधिक अंक लाया था और इसलिए उसे अनारक्षित PWD-LV पद पर नियुक्त किया जाना सही था।
अदालत ने कहा:
“कम मेरिट वाले अनारक्षित उम्मीदवार को अधिक मेरिट वाले आरक्षित उम्मीदवार पर वरीयता देना संविधान के समानता सिद्धांत के विपरीत होगा।”
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के आदेश को रद्द कर दिया और सिंगल बेंच के फैसले को बहाल करते हुए अधिक अंक पाने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति को सही ठहराया।
Case Details:
Case Title: The West Bengal State Electricity Transmission Co. Ltd. & Ors. vs Dipendu Biswas & Ors.
Case Number: Civil Appeal No. 10262 of 2025
Judge: Justice Nongmeikapam Kotiswar Singh
Decision Date: 2026 (INSC 330)










