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घर में प्रार्थना के लिए अनुमति जरूरी नहीं:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस नोटिस किए रद्द

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि घर में शांतिपूर्ण प्रार्थना के लिए अनुमति जरूरी नहीं, पुलिस के नोटिस रद्द करते हुए हस्तक्षेप रोकने का आदेश दिया। - बद्री प्रसाद साहू और अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य और अन्य।

Shivam Y.
घर में प्रार्थना के लिए अनुमति जरूरी नहीं:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस नोटिस किए रद्द

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि किसी व्यक्ति को अपने घर में शांतिपूर्ण प्रार्थना करने से रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने पुलिस द्वारा जारी नोटिसों को रद्द करते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला बद्री प्रसाद साहू और अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य और अन्य। से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे अपने निजी मकान में वर्ष 2016 से ईसाई धर्म के अनुयायियों के साथ प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे थे।

उनके अनुसार, पुलिस द्वारा बार-बार नोटिस जारी कर उन्हें ऐसी सभाएं करने से रोका जा रहा था। साथ ही ग्राम पंचायत द्वारा पहले दिया गया “नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” भी वापस ले लिया गया।

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याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से इन नोटिसों को रद्द करने और उनके धार्मिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि प्रार्थना सभा उनके निजी आवास में होती है और इसमें कोई अवैध गतिविधि या सार्वजनिक उपद्रव नहीं होता।

उन्होंने तर्क दिया कि:

  • पुलिस द्वारा जारी नोटिस अनुचित हैं
  • धार्मिक स्वतंत्रता संविधान के तहत संरक्षित है
  • किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है

राज्य की ओर से प्रस्तुत वकील ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कुछ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

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उन्होंने यह भी बताया कि प्रार्थना सभा के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए पुलिस ने नोटिस जारी किए।

न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि:

“किसी भी व्यक्ति को अपने घर में प्रार्थना या धार्मिक सभा आयोजित करने से रोकने वाला कोई कानून नहीं है।”

कोर्ट ने आगे कहा:

“यदि ऐसी गतिविधि में कोई अवैधता या कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, तो पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है।”

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शोर या कानून-व्यवस्था से संबंधित कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो प्रशासन उचित कार्रवाई कर सकता है।

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कोर्ट ने पुलिस द्वारा जारी सभी नोटिसों (दिनांक 18.10.2025, 22.11.2025 और 01.02.2026) को रद्द कर दिया।

साथ ही निर्देश दिया कि:

  • पुलिस याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न करे
  • उनके नागरिक और धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप न किया जाए

हालांकि, ग्राम पंचायत द्वारा एनओसी वापस लेने के मुद्दे पर कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

अंततः, याचिका आंशिक रूप से स्वीकार कर ली गई।

Case Details:

Case Title: Badri Prasad Sahu & Anr. vs State of Chhattisgarh & Ors.

Case Number: WPC No. 1281 of 2026

Judge: Justice Naresh Kumar Chandravanshi

Decision Date: 24 March 2026

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