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सुप्रीम कोर्ट: पेंशनर्स को महंगाई भत्ता (DA) से कम महंगाई राहत (DR) देना असंवैधानिक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि DA और DR की अलग-अलग दरें असंवैधानिक हैं क्योंकि दोनों का उद्देश्य महंगाई से राहत देना है। - केरल राज्य बनाम एम. विजयकुमार एवं अन्य।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट: पेंशनर्स को महंगाई भत्ता (DA) से कम महंगाई राहत (DR) देना असंवैधानिक

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि जब महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का उद्देश्य समान है, तो उनके बढ़ोतरी की दर अलग-अलग नहीं हो सकती। अदालत ने कहा कि ऐसा करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला केरल राज्य बनाम एम. विजयकुमार और अन्य से जुड़ा है।

केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने याचिका दायर कर कहा कि उन्हें दिए जाने वाले DR की वृद्धि दर (11%) कर्मचारियों को दिए गए DA (14%) से कम है।

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उनका तर्क था कि दोनों का उद्देश्य महंगाई से राहत देना है, इसलिए अलग-अलग दरें देना अनुचित और भेदभावपूर्ण है।

शुरुआत में सिंगल जज ने याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस निर्णय को पलटते हुए इसे असंवैधानिक माना।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच (न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले) ने कहा कि:

“महंगाई का प्रभाव सेवा में कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों पर समान रूप से पड़ता है।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि DA और DR का मूल उद्देश्य एक ही है-महंगाई के प्रभाव को संतुलित करना।

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“जब उद्देश्य समान है और महंगाई सूचकांक भी एक ही है, तो वृद्धि दर में अंतर का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है।”

कोर्ट ने अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा भेदभाव मनमाना और असंवैधानिक है।

राज्य सरकार और KSRTC ने दलील दी कि:

  • सेवारत कर्मचारी और पेंशनर्स अलग-अलग वर्ग हैं
  • वित्तीय स्थिति को देखते हुए अलग दर तय की गई

लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

  • वर्गीकरण तभी मान्य है जब उसका उद्देश्य से सीधा संबंध हो
  • यहां उद्देश्य (महंगाई से राहत) दोनों के लिए समान है
  • इसलिए अलग-अलग दर तय करना तर्कसंगत नहीं है

“अलग दरें तय करना उद्देश्य से कोई तार्किक संबंध नहीं रखता और यह स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है।”

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए केरल सरकार और KSRTC की अपील खारिज कर दी।

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अदालत ने कहा कि DA और DR की वृद्धि दर में अंतर करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है और यह असंवैधानिक है।

Case details

Case Title: The State of Kerala vs. M. Vijayakumar & Ors.

Case Number: Civil Appeal (arising out of SLP (C) Nos. 11592–11593 of 2023) with SLP (C) No. 18030 of 2023

Judge: Justice Manoj Misra and Justice Prasanna B. Varale

Decision Date: 10 April 2026

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