सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि समान परिस्थितियों में कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब नियमों में शैक्षिक योग्यता में छूट का प्रावधान है और समान पदों पर अन्य कर्मचारियों को छूट देकर पदोन्नति दी गई है, तो उसी तरह का लाभ एक समान कर्मचारी को भी मिलना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि
अपीलकर्ता कमल प्रसाद दुबे वर्ष 1987 से सहकारी समिति में कार्यरत थे और लंबे समय से समिति प्रबंधक के पद पर काम कर रहे थे। 2013 में बने नए नियमों में पदोन्नति के लिए स्नातक व कंप्यूटर योग्यता की शर्त जोड़ी गई, लेकिन नियमों में यह भी कहा गया कि विशेष अनुभव, योग्यता या वरिष्ठता के आधार पर शैक्षिक योग्यता में छूट दी जा सकती है।
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संबंधित सहकारी समिति के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और जनरल बॉडी ने उनके 26–28 वर्षों के अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए शैक्षिक योग्यता में छूट देकर पदोन्नति की सिफारिश की। परंतु रजिस्ट्रार ने 07 जून 2016 को बिना विस्तृत कारण बताए प्रस्ताव खारिज कर दिया।
अपीलकर्ता ने चुनौती दी। सिंगल जज ने उनके पक्ष में फैसला दिया, लेकिन डिविजन बेंच ने यह कहते हुए निर्णय पलट दिया कि रजिस्ट्रार का निर्णय सही है।
पीठ ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से भेदभाव का मामला है। अदालत ने नोट किया कि समान योग्यता और परिस्थितियों वाले दो अन्य कर्मचारियों को रजिस्ट्रार द्वारा पदोन्नति की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने कहा:
“भेदभाव अन्याय का ही दूसरा नाम है।”
पीठ ने यह भी माना कि नियमों में दी गई छूट का अधिकार बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के पास था, और जब बोर्ड व जनरल बॉडी ने छूट देकर पदोन्नति की सिफारिश कर दी थी, तब रजिस्ट्रार द्वारा बिना कारण बताए अस्वीकृति मनमानी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के 11.11.2019 और 17.12.2019 के आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट ने माना कि अपीलकर्ता के साथ समानता के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ और उन्हें भी वही राहत मिलनी चाहिए जो समान स्थिति वाले कर्मचारियों को मिली।
अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए अपीलकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
Case Details
Case Title: Kamal Prasad Dubey v. State of Madhya Pradesh & Ors.
Case Number: Civil Appeals arising from SLP (C) Nos. 13578–13579 of 2020
Judges: Justice Prashant Kumar Mishra & Justice N.V. Anjaria
Decision Date: 10 April 2026










