मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

घर से ऑफिस चलाने वाले वकील से कमर्शियल बिजली दर नहीं वसूली जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि घर से कार्यालय चलाने वाले अधिवक्ताओं से कमर्शियल बिजली टैरिफ नहीं लिया जा सकता और उन्हें घरेलू दरों पर बिल मिलेगा। - संतोष अग्रवाल बनाम मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड और अन्य

Shivam Y.
घर से ऑफिस चलाने वाले वकील से कमर्शियल बिजली दर नहीं वसूली जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि यदि कोई अधिवक्ता अपने घर से ही कार्यालय संचालित करता है, तो उससे कमर्शियल बिजली टैरिफ नहीं वसूला जा सकता। अदालत ने माना कि वकालत को केवल इस आधार पर व्यावसायिक गतिविधि नहीं कहा जा सकता कि पेशेवर काम घर से किया जा रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका अधिवक्ता संतोष अग्रवाल ने दायर की थी। बिजली वितरण कंपनी ने 31 दिसंबर 2020 के आदेश के जरिए उनके घर में चल रहे कार्यालय को “कमर्शियल उपयोग” मानते हुए बिजली बिल व्यावसायिक दरों पर जारी किया था।

याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि वकालत व्यापार या खरीद-बिक्री का काम नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत ज्ञान और कौशल पर आधारित पेशा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब कार्यालय उनके आवासीय परिसर में ही संचालित हो रहा है, तब बिजली का बिल भी घरेलू दरों पर ही लिया जाना चाहिए।

उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आवासीय परिसर में चल रहे वकील के कार्यालय और अलग व्यावसायिक भवन में स्थित कार्यालय के बीच स्पष्ट अंतर है।

वहीं, बिजली कंपनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देकर कहा गया कि परिसर का उपयोग “गैर-घरेलू” होने पर कमर्शियल टैरिफ लागू होगा।

न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का परीक्षण करते हुए कहा कि उस मामले में मुख्य सवाल “नॉन-डोमेस्टिक यूज” का था, न कि यह कि वकालत स्वयं में कमर्शियल गतिविधि है या नहीं।

अदालत ने कहा कि “कॉमर्स” या “कमर्शियल” शब्द का संबंध सामान्यतः व्यापार, खरीद-बिक्री और कारोबारी गतिविधियों से होता है। वकालत को ऐसे व्यापारिक कार्यों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

पीठ ने पूर्व फैसले का उल्लेख करते हुए कहा,

“पेशेवर गतिविधि वह होती है जो व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत योग्यता और बुद्धिमत्ता से करता है। पेशेवर कार्य और व्यावसायिक गतिविधि में मूलभूत अंतर होता है।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अधिवक्ता का कार्यालय किसी अलग व्यावसायिक भवन में हो, तो स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन आवासीय परिसर में स्थित कार्यालय को कमर्शियल श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

हाईकोर्ट ने बिजली कंपनी के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपने घर में स्थित कार्यालय के लिए केवल घरेलू बिजली दरों का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे। अदालत ने बिजली कंपनी को संशोधित बिल जारी करने का निर्देश भी दिया।

अदालत ने कहा,

“यदि अधिवक्ता का कार्यालय आवासीय परिसर में संचालित हो रहा है, तो उसे कमर्शियल गतिविधि नहीं माना जा सकता।”

Case Details

Case Title: Santosh Agrawal v. Madhya Pradesh Madhya Kshetra Vidhut Vitran Co. Ltd. & Others

Case Number: Writ Petition No. 1507 of 2021

Judge: Justice Milind Ramesh Phadke

Decision Date: May 11, 2026

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories