सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़े मामले में वसीयत (Will) को वैध मानते हुए पत्नी और बच्चों की चुनौती खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि प्राकृतिक उत्तराधिकारियों को संपत्ति से बाहर रखा गया है, वसीयत को संदेहास्पद नहीं माना जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला बी. शीना नायरी की संपत्तियों से जुड़ा था, जो बॉम्बे में चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और कर्नाटक के उडुपी क्षेत्र में कृषि एवं पैतृक जमीनों के मालिक थे। उन्होंने 15 मई 1983 को एक वसीयत तैयार की थी, जिसमें विवादित संपत्तियां अपनी बहन लक्ष्मी नायर्थी के नाम कर दी थीं।
30 नवंबर 1983 को उनकी मृत्यु के बाद पत्नी पार्वती नायर्थी और बच्चों ने राजस्व रिकॉर्ड में संपत्तियां अपने नाम दर्ज करा लीं। बाद में लक्ष्मी नायर्थी ने अदालत में दावा किया कि संपत्तियों की वास्तविक मालिक वही हैं क्योंकि वसीयत उनके पक्ष में थी।
पत्नी और बच्चों ने अदालत में कहा कि वसीयत फर्जी है और उस पर मौजूद हस्ताक्षर असली नहीं हैं।
ट्रायल कोर्ट ने वसीयत को सही माना। अदालत ने गवाह बी. जगन्नाथा नायरी की गवाही पर भरोसा किया, जिन्होंने बताया कि वसीयत उनके सामने बनाई गई थी और उन्होंने खुद टेस्टेटर को दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते देखा था।
कोर्ट ने यह भी पाया कि पत्नी और बच्चों ने खुद गवाही देने के लिए अदालत में पेश होना जरूरी नहीं समझा। केवल पावर ऑफ अटॉर्नी धारक ने बयान दिया, जिसे अदालत ने पर्याप्त नहीं माना।
इसके बाद फर्स्ट अपीलेट कोर्ट और फिर कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वसीयत को साबित करने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है और इस मामले में वह प्रक्रिया पूरी की गई थी। अदालत ने माना कि वसीयत के गवाह ने स्पष्ट रूप से उसके निष्पादन की पुष्टि की।
पीठ ने कहा,
“वसीयत स्वेच्छा से और पूरी मानसिक स्थिति में बनाई गई थी।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को अपनी संपत्ति अपनी इच्छा के अनुसार बांटने का अधिकार है। केवल पत्नी और बच्चों को संपत्ति से बाहर रखने से वसीयत अवैध नहीं हो जाती।
कोर्ट ने यह दलील भी खारिज कर दी कि वसीयत को कई साल बाद पेश किया गया, इसलिए वह संदिग्ध है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से यह साफ है कि वसीयत के बारे में संबंधित अधिकारियों को पहले ही जानकारी दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी अदालतों ने सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन किया है और फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
पीठ ने कहा,
“सभी अदालतों के समान निष्कर्ष सही और तर्कसंगत हैं।”
इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज कर दी।
Case Details
Case Title: Parvathi Nairthi (Dead) & Ors. v. Laxmi Nairthy (Dead) Through LRs. & Ors.
Case Number: Civil Appeal No. 6859 of 2014
Judges: Justice Vijay Bishnoi and Justice Ujjal Bhuyan
Decision Date: May 21, 2026
Counsels: Ms. Meenakshi Arora for Appellants; Mr. Vinay Navare for Respondents










