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घोषित बिजली क्षमता साबित न करने पर ₹162 करोड़ जुर्माना बहाल: सुप्रीम कोर्ट ने तलवंडी साबो पावर को राहत देने वाला आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने तलवंडी साबो पावर पर लगाया गया ₹162 करोड़ का जुर्माना बहाल करते हुए कहा कि घोषित बिजली क्षमता साबित न करना सख्त दायित्व के दायरे में आता है। - पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम तलवंडी साबो पावर लिमिटेड और अन्य।

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घोषित बिजली क्षमता साबित न करने पर ₹162 करोड़ जुर्माना बहाल: सुप्रीम कोर्ट ने तलवंडी साबो पावर को राहत देने वाला आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) पर लगाया गया ₹162 करोड़ से अधिक का जुर्माना बहाल करते हुए कहा है कि यदि कोई बिजली उत्पादक कंपनी अपनी घोषित उत्पादन क्षमता साबित करने में विफल रहती है, तो उस पर “सख्त दायित्व” (strict liability) के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए जानबूझकर गलत मंशा साबित करना जरूरी नहीं है।

न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि पंजाब स्टेट ग्रिड कोड के तहत घोषित क्षमता को प्रदर्शित न कर पाना अपने आप में दंडनीय है और इसके लिए “mens rea” यानी दोषपूर्ण मंशा साबित करना आवश्यक नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला पंजाब स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (PSLDC) द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा था। आरोप था कि TSPL ने जनवरी 2017 के कुछ दिनों में अपनी बिजली उत्पादन क्षमता वास्तविक क्षमता से अधिक घोषित की, लेकिन जब उसे क्षमता साबित करने के लिए कहा गया तो वह ऐसा नहीं कर सकी।

शुरुआत में पांच दिनों के लिए कुल ₹162.74 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था, जिसमें से लगभग ₹74 करोड़ कंपनी के लंबित बिलों से समायोजित भी कर लिए गए थे।

पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (SERC) ने चार तारीखों के लिए “गलत घोषणा” का निष्कर्ष बरकरार रखा था। हालांकि बाद में अपीलीय विद्युत अधिकरण (APTEL) ने इस आदेश को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में “गेमिंग” और “घोषित क्षमता साबित न कर पाने” के बीच स्पष्ट अंतर बताया।

पीठ ने कहा कि “गेमिंग” तब माना जाएगा जब कोई कंपनी जानबूझकर गलत जानकारी देकर अनुचित आर्थिक लाभ कमाने की कोशिश करे। ऐसे मामलों में गलत मंशा साबित करना जरूरी होता है। लेकिन घोषित क्षमता को साबित न कर पाने का मामला अलग है।

अदालत ने कहा:

“घोषित क्षमता का प्रदर्शन तय चार टाइम-ब्लॉक के भीतर न होने पर सख्त दायित्व लागू होगा।”

कोर्ट ने APTEL की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि चार टाइम-ब्लॉक की शर्त लागू नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ग्रिड संचालन की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है।

पीठ ने यह भी कहा कि रेगुलेशन 11.3.13 के तहत लगाया जाने वाला दंड “सिविल दायित्व” है, इसलिए इसमें आपराधिक मामलों की तरह दोषपूर्ण मंशा साबित करने की आवश्यकता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने 15, 17, 24 और 31 जनवरी 2017 के रिकॉर्ड का विस्तार से परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि कंपनी नोटिस मिलने के बाद निर्धारित चार टाइम-ब्लॉक के भीतर अपनी घोषित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल नहीं कर सकी।

एक मौके पर कंपनी ने नोटिस मिलने के बाद अपनी घोषित क्षमता को और कम कर दिया था, जिसे अदालत ने महत्वपूर्ण तथ्य माना।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और PSLDC की अपीलें स्वीकार करते हुए APTEL का आदेश रद्द कर दिया और SERC द्वारा लगाया गया जुर्माना बहाल कर दिया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि “गेमिंग” और “घोषित क्षमता साबित न कर पाने” से जुड़े प्रावधान अलग-अलग हैं और दोनों को एक समान नहीं माना जा सकता।

Case Details

Case Title: Punjab State Power Corporation Limited v. Talwandi Sabo Power Limited & Ors.

Case Number: Civil Appeal No. 7432 of 2025 with Civil Appeal No. 7436 of 2025

Judge: Justice K. Vinod Chandran and Justice Sanjay Kumar

Decision Date: May 20, 2026

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