शादी से ठीक पहले गिरफ्तारी के डर से जूझ रहे एक आरोपी को बॉम्बे हाईकोर्ट से अस्थायी राहत मिली है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि संबंधित मामले में तब तक कोई कठोर कार्रवाई न की जाए, जब तक निचली अदालत लंबित अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला नहीं कर लेती।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला प्रतीक रामचंद्र गोगावले बनाम महाराष्ट्र राज्य से जुड़ा है। आवेदक के खिलाफ पुणे के वार्तक नांदेड सिटी पुलिस स्टेशन में 14 अप्रैल 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत लगाए गए हैं।
एफआईआर दर्ज होने के बाद आवेदक ने विशेष न्यायालय (POCSO मामलों के लिए) में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी। हालांकि, उस अदालत ने नोटिस जारी करते हुए तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आवेदक ने हाईकोर्ट का रुख किया।
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आवेदक के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल की शादी 4 मई 2026 को तय है और सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने आशंका जताई कि मामले की सुनवाई में देरी हो सकती है और इस दौरान गिरफ्तारी होने से आवेदक को गंभीर नुकसान होगा।
वकील ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता और आवेदक के बीच पहले संबंध थे और बाद में विवाद पैदा हुआ।
“एफआईआर में जो आरोप हैं, वे एक ऐसे संबंध की ओर इशारा करते हैं जो समय के साथ बिगड़ गया,” उन्होंने दलील दी।
राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक ने इस याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि जब अग्रिम जमानत याचिका पहले से ही विशेष अदालत में लंबित है, तो आवेदक को वहीं अपनी दलीलें रखनी चाहिए।
न्यायमूर्ति अश्विन डी. भोबे की एकल पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सामान्य परिस्थितियों में इस तरह के मामलों को उसी अदालत में रहने देना उचित होता है, जहां याचिका लंबित है।
हालांकि, अदालत ने इस मामले की विशेष परिस्थितियों पर ध्यान दिया, खासकर आवेदक की निकट भविष्य में होने वाली शादी को।
अदालत ने कहा,
“रिकॉर्ड से prima facie यह प्रतीत होता है कि दोनों पक्षों के बीच पहले एक संबंध था, जो बाद में विवाद में बदल गया।”
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि आवेदक के खिलाफ कोई भी कठोर कदम (जैसे गिरफ्तारी) तब तक न उठाया जाए, जब तक विशेष न्यायालय अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला नहीं कर देता।
साथ ही, अदालत ने विशेष न्यायालय से अनुरोध किया कि वह इस मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करे और 30 अप्रैल 2026 से दो सप्ताह के भीतर याचिका का निपटारा करे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियों का उपयोग अंतिम सुनवाई के दौरान नहीं किया जाएगा।
Case Details
Case Title: Pratik Ramchandra Gogawale v. State of Maharashtra
Case Number: Anticipatory Bail Application No. 1169 of 2026
Judge: Justice Ashwin D. Bhobe
Decision Date: April 29, 2026











